छत्तीसगढ़

देव, गुरु और धर्म पर हो हमारी सच्ची श्रद्धा : साध्वी रत्ननिधि

रायपुर : ऋषभदेव जैन मंदिर सदरबाजार में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में साध्वी रत्ननिधि ने नवपद ओली की आराधना के षष्ठम दिवस श्रद्धालुओं को `सम्यक दर्शन पद की महिमा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि, जिसे सम्यक दर्शन हो जाता है वह जड़-चेतन के भेद को भलीभांति जान जाता है। उसे शरीर और शरीर के साथ जुड़े हुए सम्बन्धों की नश्वरता का सदैव भान रहता है। संसार की वास्तविकता को समझने के लिए हमें परमात्मा के वचनों से प्रेम करना होगा। जो सुख में लीन और दुख में दीन नहीं बनता वही सम्यकत्वी है। आज जो हमारा पुण्य चमक रहा है वह कल अस्त भी हो जाएगा। सम्यक दर्शन ही मोक्ष का मार्ग है।
साध्वी ने कहा कि, सम्यक दर्शन पद के 67 भेद बताए गए हैं। सम्यक दर्शन पद की आराधना हमें 67 खमासणे, 67 फेरी के साथ ` उं ह्रीं श्रीं सम्यक दर्शनाय` की 20 माला फेरते हुए करनी चाहिए। सम्यक दृष्टा व्यक्ति की अपने देव, गुरु और धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा होती है। देव और गुरु के प्रति हमारी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण हो तो उनका एक वचन भी हमारे जीवन को तारने में सक्षम हो जाता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण ने एकलव्य ने गुरु प्रतिमा के समक्ष धनुर्विद्या में निपुण बना दिया। आज सम्यक दर्शन पद की आराधना करते हुए हम देव, गुरु और धर्म पर सच्ची श्रद्धा रखकर यह प्रार्थना करें कि हमारी श्रद्धा सदैव अटूट बनी रहे। अरिहंत, सिद्ध हमारे देव हैं, आचार्य, उपाध्याय और साधू हमारे गुरु हैं, इन पर हमारी दृढ़ श्रद्धा-आस्था टिकी रहे। ऐसा सम्यक दर्शन हममें स्थिर रूप सदैव विद्यमान रहे, प्रभु और गुरु के प्रति श्रद्धा जिसकी होती है, उसके जीवन में अनेक सद्गुण स्वत: आ जाते हैं। अज्ञानता चली जाती है। जड़-चेतन के भेद ज्ञान को जानने वाला सम्यक दृष्टा संसार में रहकर भी संसार से सदा अलिप्त रहता है। वह जहां भी जाता है, पापों को जलाने, नष्ट करने का कार्य करता है, हिंसा और दुगुर्णों में वह कभी लिप्त नहीं रहता। हमें सम्यक दर्शन की प्राप्ति के लिए अपना पुरुषार्थ, परिश्रम करना चाहिए। यह तभी प्राप्त होगा, जब हमारी श्रद्धा देव, गुरु और धर्म के प्रति सच्ची होगी। जो भगवान ने कहा, जो पर्यूपणा की, वही पूर्णत: सत्य है, ऐसी आस्था-श्रद्धा हम सबकी बनी रहे।
प्रचार प्रभारी मानस कोचर ने कहा कि, नवपदजी की ओली की आराधना के सोमवार को षष्ठम दिवस अनेक श्रद्धालुओं ने सम्यक दर्शन की विधिवत आराधना की। साथ ही संध्या समय बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की ओर से प्रतिक्रमण जीवों का अभयदान दिया गया।

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