छत्तीसगढ़

हमारे नौजवानों ने बीजेपी के बड़े-बड़े शूरमाओं को पछाड़ा : सीएम बघेल

निकाय चुनाव के नतीजे को सीएम भूपेश ने बताया ऐतिहासिक

रायपुर: रायपुर नगर निगम में नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस को मिली जीत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कॉफ्रेंस करते हुए सभी पार्षदों को बधाई और शुभकामनाए दी.

सीएम भूपेश ने कहा कि हमारे कांग्रेस के नौजवानों ने बीजेपी के बड़े-बड़े शूरमाओं को पछाड़ा है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत, सरकार के कामकाज पर जनता ने भरोसा जताया. दस निगम में से नौ में बहुमत मिलना और एक में बीजेपी को बहुमत नहीं मिलना, इतिहास में पहली बार होगा. यह बड़ी सफलता है. अब आगे सर्व सम्मति से फैसले लिए लेकर सबकी सहमति से महापौर और अध्यक्ष के चुनाव होंगे.

बीजेपी सिर्फ एक नगर निगम में आगे

मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि बीजेपी सिर्फ एक नगर निगम में आगे हैं, वहां भी उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं है. समन्वित रूप से प्रयास को जीत मिली है. कोरबा में थोड़ा आगे हैं, अधिकांश जगह कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. रायपुर में हम हैट्रिक करने जा रहे हैं.

तीसरी बार यहां के निगम में कांग्रेस का कब्जा होगा. दुर्ग में पिछले 20 सालों से हम बाहर थे, सबसे बड़ी जीत दुर्ग में हमें मिली है. एकतरफा सफलता मिली है. मुझे याद नहीं कि आखिरी बार धमतरी में कब जीते थे, लेकिन आज बीजेपी से बढ़त मिली है.

रमन सिंह के निर्वाचन क्षेत्र में बढ़त मिली है. कवर्धा में एकतरफा जीत मिली है. नेता प्रतिपक्ष के क्षेत्र में सफलता मिली है. चाहे नगर निगम हो, नगर पालिका हो या नगर पंचायत आशातीत सफलता मिली है.

किन कारणों से हम कई निकायों में पिछड़े

उन्होंने कहा कि किन कारणों से हम कई निकायों में पिछड़े हैं, उसकी समीक्षा की जाएगी. कोशिश की जाएगी कि अगली बार सुधार किया जाए. कोंडागांव नगर पालिका में पिछली बार हम एकतरफा जीत हासिल किए थे. 21 में से 18 पार्षद हमारे थे.

कभी-कभी स्थितियां प्रतिकूल हो जाती है. समीकरण ठीक से नहीं बैठ पाता. कई बार अपेक्षा बहुत बढ़ जाती है, हम उसकी पूर्ति नहीं कर पाते. मुझे लगता है कि ऐसी कोई बड़ी घटना नहीं घटी है, जिसे रेखांकित किया जाए.

उन्होंने कहा कि पिछले निकाय चुनाव में हमने 6 निगम जीते थे. तब अंबिकापुर को छोड़कर बाकी जगहों पर बहुमत नहीं था. लेकिन इस चुनाव में बहुमत हमारे पक्ष में है. यह नतीजे ऐतिहासिक है. बीजेपी को किसी निकाय में बहुमत नहीं मिला है. जिस वार्ड से एक नाम आएगा, वहां कंडीडेट बनाएंगे.

यह प्रक्रिया हमने तय की थी. मोहन मरकाम अध्यक्ष बने तब भी इसी फार्मूले को एडाप्ट किया था. आगे क्या होगा इसे लेकर पीसीसी में बैठकर तय कर लेंगे. सर्व सम्मति से फैसले लिए जाएंगे. सबकी सहमति से महापौर और अध्यक्ष के चुनाव होंगे.

इस चुनाव में केवल 2840 पार्षदों की लड़ाई लड़नी पड़ी. पहले जैसे व्यवस्था होती तो महापौर, अध्यक्षों को जीताने की भी बड़ी जिम्मेदारी होती. ये हमारे लिए बड़ी चुनौती थी. ईव्हीएम पर लोगों को विश्वास नहीं है. शंका बनी रहती है. हमे अवसर मिला, तो हमने तय किया कि चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए.

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