एक करोड़ का जलकर बकाया, भुगतान में नहीं ले रहे रुचि

-हिमांशु सिंह ठाकुर

कवर्धा।

पानी की कीमत उनसे ही पुछिए जो लोग कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर वनांचल के ग्रामीण जो झिरिया से पानी पीने के लिए लाते है। कवर्धा शहर में तो कीचन तक पानी पहुंच रहा हैं इसके बाद भी इसकी कीमत कवर्धा के नगरवासी नहीं चुका पा रहे हैं।

कवर्धा शहर में 7600 लोगों के घरों में नगरपालिका के द्वारा पानी सप्लाई की जाती है। जो घर पहुंच पानी उपलब्ध हो जाता है। ठिक उसके बावजूद भी लोग जलशुल्क का भुगतान करने के लिए आनाकानी करते हैं। लंबे समय से कवर्धा शहरवासियों का भुगतान नहीं होने से लोगों पर जलकर बकाया चढ़ गया हैं।पिछले वित्तीय वर्षो का लोगों पर 99 लाख का भुगतान बकाया हैं,वहीं पिछले वर्ष 51 लाख की ही वसूली हो सकी है।

बकाया जलकर में इस वर्ष करीब 13 लाख की वसूली ही हो सकी हैं।वहीं इस वर्ष 1.20 लाख रुपएं की वसूली करना है.इसमें अब तक 18 लाख की ही वसूली हो सकी हैं। इसका मतलब यह है कि इस वर्ष नगर पालिका प्रशासन को 1.89 लाख रुपएं का जलकर वसूली करना हैं।

-सख्ती से पेश आने की आवश्कता

नगर वासियों का बकाया बिजली बिल पर यदि तीन माह के भीतर भुगतान नहीं करेंगें तो कनेक्शन की काट दिया जाता है। गनीमत तो यह है कि एैसी व्यवस्था नगर पालिका प्रशासन में नहीं हैं. अन्यथा हर माह कई दर्जन नल कनेक्शन कट जाते और कनेक्शन जुड़वाने के लिए पालिका के चक्कर काटने पड़ जाते । लोगों को समझाना होगा कि जो राशि वह जलकर के रूप में भुगतान करते है वही राशि शासन को जाती है,जो किसी न किसी योजना के रूप में शासन वापस आम लोगों को ही मिलता हैं।

– निर्धारित है जल शुल्क

300 रुपए से अधिक का टैक्स पटाने वाले संपत्तिकरदाताओं को सामान्य नल के लिए 180 रुपए प्रति माह भुगतान करना पड़ता है। वहीं 300 रुपए तक का टैक्स जमा करने वाले समेकित कर दाताओं को 60 रुपए , भागीरथी नल जल योजना वालों को 60 रुपएं और कामर्सियल के लिए 300 रुपए प्रतिमाह निर्धारित हैं।

– शहरवासियों को नोटिस का कोई भी असर नहीं हो रहा

वित्तीय वर्ष बीतते -बीतते फिर से 80 से लगभग 90 लाख की राशि बकाया रह जाता हैं।जब कि पूर्व कई वर्षों का बकाया ही रहता हैं लोगों पर पिछले पांच से अधिक वर्षो का बकाया है परंतु लोगों पर पिछले पांच वर्षो का बकाया राशि नहीं वसूला जा सका हैं पालिका से बार -बार नोटिस पहुंचता है बावजूद उसके लोग इस पर ध्यान नहीं देते है। नेशनल लोक अदालत में समझौता के रूप में कुछ राशि लोग जरूर जमा करते है।

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