Padmaavat की इन 5 बातों से हो जाएगा राजपूतों का स‍िर ऊंचा, ये रहे शान बढ़ाने वाले डायलॉग

स्‍पेशल स्‍क्रीन‍िंग के दौरान हमने जाना क‍ि फ‍िल्‍म में व‍िरोध करने जैसा कुछ नहीं है, ये फ‍िल्‍म न‍िसंदेह राजपूतों के गौरव का बखान करती है

Padmaavat की इन 5 बातों से हो जाएगा राजपूतों का स‍िर ऊंचा, ये रहे शान बढ़ाने वाले डायलॉग

संजय लीला भंसाली की फ‍िल्‍म ‘पद्मावत’ के बारे में करणी सेना और राजपूत समाज द्वारा कई ऐसे दावे क‍िए गए थे, ज‍िसके आधार पर इस फ‍िल्‍म का पूरे देशभर में व‍िरोध क‍िया जा रहा है। स्‍पेशल स्‍क्रीन‍िंग के दौरान हमने जाना क‍ि फ‍िल्‍म में व‍िरोध करने जैसा कुछ नहीं है, ये फ‍िल्‍म न‍िसंदेह राजपूतों के गौरव का बखान करती है।

गौरव के ल‍िए जीते हैं राजपूत
शाहिद कपूर ने महाराजा रावल रतन सिंह के किरदार के साथ न्याय किया है। वह शुरू से अंत तक शालीन नजर आए हैं। फिल्म के हर सीन में सिर से पांव तक ढकीं नज़र आई हैं दीपिका पादुकोण, अपने चेहरे के हाव-भाव और खासतौर से आंखों के जरिए जो दमदार अभिनय किया है, वह सराहनीय है। फिल्म की शुरुआत से लेकर आखिरी तक जो बात फिल्म पर हावी रहती है, वह राजपूतों का गौरव है। अपनी बात पर अटल रहना। फिल्म में कहीं भी एक बार भी राजपूताना गौरव को धूमिल नहीं किया गया है, बल्कि उसे शानदार ढंग से पेश ही किया गया है। ‘कह दीजिए अपने सुल्तान से कि उनकी तलवार से ज़्यादा लोहा हम सूर्यवंशी मेवाड़ियों के सीने में है…’- शाह‍िद कपूर का ये डायलॉग रौंगटे खड़े कर देता है।

वचन ही है शासन
चाहे प्यार हो या गुस्सा, हर तरह का इमोशन तुरंत दीपिका की बड़ी-बड़ी आंखों से साफ महसूस किया जा सकता है। 30-30 किलो के खूबसूरत लहंगों, भारी गहनों और खासतौर पर नाक की नथ में दीपिका खूब जमी हैं। दीप‍िका ख‍िलजी की शर्त मानकर द‍िल्‍ली जाने का ठान लेती हैं और 800 दास‍ियों के रूप में छ‍िपे सैन‍िकों के साथ ख‍िलजी के क‍िले में पहुंचती हैं। अलाउद्दीन खिलजी और राजा रतनसेन की मुलाकात होती है, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती का जिक्र करता है तो तलवारें निकल जाती हैं लेकिन राजा रतनसेन सिर्फ इसलिए अलाउद्दीन को छोड़ देते हैं ताकि वे अपनी राजपूती परंपरा का निर्वाह कर सकें। राजपूतों से जुड़ी सबसे बड़ी बात यही है कि वे अपनी बात के अटल रहते हैं।

न‍िडर होते हैं राजपूत
दीप‍िका और शाह‍िद दोनों ही न‍िडर द‍िखे हैं दीप‍िका कहती हैं क‍ि ‘डर नाम का गहना पद्मावती ने कभी पहना ही नहीं’, वहीं राजा रतनसेन ये जानते हुए भी क‍ि अलाउद्दीन भरोसे के काबिल नहीं है, उसकी मेहमाननवाजी स्वीकारते हैं और उसके पास जाते हैं। नतीजा ये होता है क‍ि धोखेबाज ख‍िलजी उन्‍हें बंधक बनाकर द‍िल्‍ली ले जाता है।

कंगन में भी है तलवार जैसी ताकत
रानी पद्मावती के रूप में दीप‍िका पादुकोण इस फ‍िल्‍म में कहती हैं ‘राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है, ज‍ितनी राजपूती तलवार में’। संजय लीला भंसाली ने दिखा दिया है कि जितने राजपूत अपनी बातों के पक्के रहे हैं और उनकी पत्नियां और महिलाएं भी मौका पड़ने पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने के काबिल हैं। राजा रतनसेन को छुड़ाने की हिम्मत अकेली पद्मावती दिखा देती है। पद्मावती प्लानिंग करती हैं, और उसे बखूबी इम्प्लिमेंट भी करती हैं। वे राजा रतनसेन को छुड़ा भी ले जाती है और अलाउद्दीन हाथ मलते रह जाता है।

न‍िहत्‍थे पर वार नहीं
‘पद्मावत’ में राजा रतनसेन के पास अलाउद्दीन खिलजी को कत्ल करने के तीन मौके मिलते हैं, लेकिन वे अपनी जुबान पर कायम रहते हैं। हर बार वे अपने नियमों की वजह से उसे बख्श देते हैं। वे निहत्थे पर वार नहीं करते, वे लाचार को कत्ल नहीं करते और घर आए मेहमान को नहीं छूते, लेकिन अलाउद्दीन जंग जीतने के अलावा कुछ नहीं जानता। जब ख‍िलजी पद्मावती को देखने की ख्‍वाह‍िश जाह‍िर करता है, तो उसके गले तक राजपूती तलवार पहुंच जाती हैं बाद में पद्मावती राजा से कहती हैं क‍ि अगर तलवार गर्दन तक पहुंच ही गई थी तो काट देते ख‍िलजी का स‍िर इस पर राजा कहते हैं क‍ि वो हमारा मेहमान था।

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