पाक ने किया परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड का बचाव

कंपनियों पर प्रतिबंध के बाद मढ़ा बदनाम करने का आरोप

इस्लामाबाद : पाकिस्तान ने सात कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद अपने परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड का बचाव किया है। उसने कहा कि कंपनियों पर संदेह का इस्तेमाल उसे बदनाम करने के लिए नहीं किया जाए। अमेरिका ने परमाणु कारोबार से जुड़े होने पर पाक कंपनियों को प्रतिबंध की सूची में शामिल किया। इससे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के पाकिस्तान के प्रयास को धक्का लग सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दुनिया भर की कई कंपनियां अमेरिकी वाणिज्य विभाग की प्रतिबंध सूची में रखी गई हैं। इनमें एनएसजी में शामिल देशों की कंपनियां भी हैं। उसने कहा कि पाकिस्तान के विरोधियों को इन प्रतिबंधों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। परमाणु सुरक्षा और अप्रसार को लेकर पाकिस्तान के प्रयास को सभी जानते हैं। गौरतलब है कि पाक अधिकारियों पर उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संबंधी गोपनीय दस्तावेज सौंपने का आरोप है।

कई देशों को परमाणु हथियार का ब्लूप्रिंट मुहैया कराने की हो चुकी है पुष्टि

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के मुताबिक, पाक वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क ने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार का ब्लूप्रिंट मुहैया कराया। अमेरिका की ओर से पाकिस्तानी कंपनियों को बैन करने के इस फैसले से परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) में शामिल होने की पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

प्रतिबंधित सूची में दक्षिण सूडान की 15 और सिंगापुर की एक कंपनी भी शामिल

अमेरिकी सरकार की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट में ब्यूरो ने कहा कि ये कंपनियां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के विपरीत काम करने वाली पाई गईं। सूची में कुल 23 कंपनियों को शामिल किया गया, जिनमें पाकिस्तान के अलावा दक्षिण सूडान की 15 और सिंगापुर की एक कंपनी शामिल है।


ये हैं पाकिस्तान की कंपनियां जिन है प्रतिबंध

सूची में शामिल सात पाक कंपनियां हैं- मुशको इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉल्यूशंस इंजीनियरिंग, अख्तर एंड मुनीर, प्रोफिशिएंट इंजीनियर्स, परवेज कमर्शियल ट्रेडिंग कंपनी, मरीन सिस्टम्स और इंजीनियरिंग एंड कमर्शियल सर्विसेज।

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