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पाकिस्तान की टीम को चाहिए विराट कोहली जैसा कप्तान, रमीज़ राजा ने दिया बयान

बाबर आजम को कड़े फ़ैसले भी लेने होंगे

ये बात थोड़ा चौंकाती ज़रूर है

लेकिन पाकिस्तान की टीम को विराट कोहली जैसा कप्तान चाहिए. ये बात हम नहीं कह रहे पाकिस्तान के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ और कप्तान रहे रमीज़ राजा ने कही है. आज कल दुनिया के कई खिलाड़ी लॉकडाउन में अपने फ़ैन्स से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. ऐसे ही एक वीडियो में रमीज़ राजा ने कहा कि वो चाहते हैं कि पाकिस्तान के नए कप्तान बाबर आजम विराट कोहली की तरह कप्तानी करें. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने हाल ही में बाबर आजम को लिमिटेड ओवर की कप्तानी सौंपी थी.

बाबर के सामने हैं कप्तानी के दो मॉडल

रमीज़ राजा ने कहा कि बाबर आज़म के सामने कप्तानी के दो मॉडल है. एक मॉडल है विराट कोहली का और दूसरा मॉडल है केन विलियम्सन का. विराट कोहली भारतीय कप्तान हैं और केन विलियम्सन न्यूज़ीलैंड के. रमीज़ राजा ने कहा कि विराट की कप्तानी में ‘एग्रेशन’ है यानी आक्रामकता है. वो फ़ील्ड पर ‘इमोशनल’ हो जाते हैं. वह विरोधी टीम को ‘चैलेंज’ करते हैं और क्रिकेट को लेकर वह बेहद आशान्वित हैं.

दूसरी तरफ़ केन विलियमसन जैसे कप्तान भी हैं. इनकी कप्तानी का मॉडल अलग है. केन विलियम्सन धीमे अंदाज़ में कप्तानी करते हैं. वह मैदान में अपने ‘इमोशन’ को क़ाबू में रखते हैं. लेकिन ये भी उतना ही बड़ा सच है कि वह अपनी कप्तानी में ‘प्रॉसेस’ को पूरी तरह ‘फ़ॉलो’ करते हैं. इसके अलावा ‘टेक्टिकली’ वो शानदार कप्तान हैं. उनकी कप्तानी में न्यूज़ीलैंड की टीम अलग ही दिखाई देती है.

बाबर के सामने ये दोनों फार्मेट हैं. लेकिन चूंकि पाकिस्तान क्रिकेट अपनी आक्रामकता के लिए जाना जाता है. इसलिए उन्हें विराट कोहली जैसे कप्तानी करनी चाहिए. ध्यान इस बात का रखना होगा कि बिना ‘कंसिसटेंसी’ के ‘एग्रेशन’ अच्छा नहीं लगता बल्कि खलने लगता है.

बाबर आजम को कड़े फ़ैसले भी लेने होंगे

रमीज़ राजा ने ये भी कहा कि बाबर आज़म को अगर इमरान ख़ान जैसी कप्तानी करनी है तो उन्हें कड़े फ़ैसले लेने होंगे. कप्तानी का एक ‘प्राइस’ होता है. जो उन्हें अदा करना होगा. रमीज़ राजा ने 1992 के विश्व कप का हवाला देते हुए कहा कि उस विश्व कप में जावेद मियांदाद और इमरान ख़ान को छोड़कर बाक़ी सभी खिलाड़ी 30 साल से कम उम्र के थे.

उन्होंने ये भी कहा कि इमरान जब किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर करते थे तो उसे उसकी वजह बताते थे. उन्होंने हमेशा ‘मेरिट’ पर टीम बनाई. बाबर आज़म को भी इस बात का ध्यान रखना होगा. हो सकता है उन्हें ज़रूरत पढ़ने पर अपने क़रीबी दोस्तों को टीम से बाहर बिठाना पड़े. लेकिन बतौर कप्तान उन्हें ऐसे फ़ैसले लेने होंगे. बतौर कप्तान उनकी बेहतरी इसी में है कि वो ‘मेरिट’ पर टीम चुनें और उसमें ‘यंगस्टर्स’ को मौक़ा दे.

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