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साढ़े तीन वर्ष पहले पाकिस्तान से आई मूक-बधिर गीता ‘स्वयंवर’ बाद भी अकेली

इंदौर : मूक-बधिर गीता को पाकिस्तान से भारत आए साढ़े तीन साल हो चुके हैं, पर सरकार अब तक उसके माता-पिता को नहीं ढूंढ़ सकी है। विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने गीता को देश बुलाकर मध्य प्रदेश के इंदौर की स्कीम नंबर 71 स्थित मूक-बधिर संगठन में आश्रय दिलाया था। एक साल पहले जोर-शोर से हुए स्वयंवर में 13 युवकों ने उससे शादी की इच्छा जताई थी, परंतु गीता ने किसी को नहीं अपनाया।

गौरतलब है कि मूक-बधिर गीता को अक्टूबर 2015 में पाकिस्तान से भारत लाया गया था। अब न तो सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि गीता की खैरियत पूछ रहा है, न ही उसके परिवार को ढूंढ़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। गीता की उम्र करीब 28 वर्ष हो चुकी है। वह बार-बार अपने परिवार के पास जाने के बारे में कहती है, लेकिन इस मामले में शासन-प्रशासन मौन साधे बैठा है।

जानकारी के अनुसार, गीता संस्था में नहीं रहना चाहती है। वहां उसकी उम्र के लोग नहीं होने से वह अच्छा महसूस नहीं करती है। उसका व्यवहार भी कुछ असामान्य होने लगा है। बीते साल उसका शारीरिक के साथ मानसिक परीक्षण भी कराया गया था। वह कई बार अवसाद में चली जाती है।

सुषमा स्वराज के कहने पर ही बीते साल जून माह में गीता की शादी की बात चली थी। सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिये गीता के लिए जीवनसाथी की तलाश के विज्ञापन दिए गए थे। देशभर से कई शिक्षित और अच्छी नौकरी वाले युवक गीता से शादी करने का प्रस्ताव लेकर आए थे। इंदौर में दो दिन तक ‘स्वयंवर’ सम्मेलन हुआ था। इसके बाद चुनिंदा युवकों को कलेक्टर ऑफिस में भी गीता से मिलवाया गया था, लेकिन एक भी युवक को गीता ने पसंद नहीं किया था।

देशभर के एक दर्जन दंपतियों ने गीता के उनकी बेटी होने का दावा किया, लेकिन एक का भी डीएनए गीता से नहीं मिला। अब भी कई दंपती कलेक्टर ऑफिस में गीता को अपनी बेटी बताने का दावा करने आते हैं। ऐसे करीब 25 परिवार हैं, जो गीता को अपनी गुम हुई बेटी बता चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा ओडिशा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल के परिवार शामिल हैं।

इंदौर के बीते सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया ‘ साल तक हम गीता का परिवार ढूंढ़ने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे। उसकी शादी के लिए भी साथी तलाशने के लिए देश में काफी प्रचार किया था, लेकिन उस समय गीता के व्यवहार से हम दुखी हो गए थे। तब से हमने खुद को गीता के मामले से अलग कर लिया। अगर सरकार हमें उसका परिवार तलाशने का मौका देती तो हम जरूर उसके परिवार तक पहुंच जाते। अब तक मूक-बधिरों के लिए उपयोग होने वाली खास तकनीक से कई बच्चों का घर तलाश चुके हैं, लेकिन गीता को हमारे पास आने ही नहीं दिया जाता है।’

सामाजिक कल्याण विभाग के संयकुत संचालक बीसी जैन ने कहा ‘गीता मूक-बधिर संगठन में रह रही है। फिलहाल उसके संबंध में शासन से नए निर्देश नहीं हैं। वह संस्था में कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण ले रही है।’

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