अफगानिस्तान में हिंसा की आग के पीछे पाकिस्तान की भूमिका UN में हुई बेनकाब

अफगानिस्तान के बिगड़ते हालात पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में तालिबान के अत्याचारों के साथ आतंकवाद को पाकिस्तान की मदद भी बेनकाब हुई. अफगानिस्तान ने जहां तालिबान के पीछे पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया. वहीं इस आपात बैठक की अगुवाई कर रहे भारत ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों की जवाबदेही तय होना जरूरी है. सुरक्षा परिषद सदस्यों ने एक सुर में अफगानिस्तान में मानवीय संकट बन रही हिंसा को रोकने के लिए संघर्षविराम पर जोर दिया.

सुरक्षा परिषद की इस अहम बैठक की अध्यक्षता कर रहे भारतीय राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति के लिए जरूरी है कि आतंकी पनाहगाहें खत्म की जाएं. साथ ही आतंकियों को रसद पहुंचाने वाली रसद लाइनों को खत्म कर आतंकवाद के हर स्वरूप के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की जरूरत है. भारत ने आग्रह किया कि सुरक्षा परिषद हालात की समीक्षा के बाद अफगानिस्तान में व्यापक शांति के लिए तत्काल संघर्ष विराम के उपायों पर कदम उठाए.

बैठक में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि ने कहा कि तालिबान ने बर्रबर हमले करना तेज किया है जिससे हालात बहुत गंभीर हो गए हैं. साथ ही चिंताजनक बात यह है कि तालिबान के साथ विदेशी लड़ाके भी शामिल हैं. इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के राजदूत गुलाम इस्काजई ने पाकिस्तान में तालिबानी लड़ाकों को मिल रहे मदद, वहां के अस्पतालों में हासिल हो रहे इलाज का हवाला देते हुए पाक सरकार से तालिबान की सप्लाई लाइन खत्म करने की अपील की.

उनका कहना था कि पाकिस्तान में तालिबान के लिए होने वाली फंड रेजिंग से लेकर उनके इलाज के अनेक वीडियो सबूत सामने आते रहे हैं. इस्काजई का कहना था कि मौजूदा हालात एक ऐसा युद्ध है जिसकी मशीन पर्दे के पीछे रहकर चलाई जा ही है. अफगान राजनयिक ने सुरक्षा परिषद के सामने लश्कर-ए-तोयबा, ईटीआईएम, आईएमयू जैसे आतंकी संगठनों से रिश्तों का भी उल्लेख किया. अफगानिस्तान ने परिषद से तालिबान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की अपील की ताकि उनपर समाधान के लिए दबाव बन सके.


अमेरिका ने सुरक्षा परिषद की बैठक में क्या कहा

इस बीच अमेरिका ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि अगर तालिबान ताकत के दम पर काबुल की सत्ता हथियाने की कोशिश करते हैं तो वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएंगे. अफगानिस्तान से अपने सेनाएं हटा रहे अमेरिका ने तालिबानी हमलों की सख्त लहजे में निंदा करते हुए कहा कि किसी मौजूदा स्थिति का सैन्य तरीके से समाधान निकालना मुमकिन नहीं है.


चीन ने सुरक्षा परिषद की बैठक में क्या कहा

इतना ही नहीं अफगानिस्तान के हालात को लेकर पाकिस्तान के हर मौसम दोस्त चीन की भी चिंताएं सामने आईं. सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि ताकत के दम पर अफगानिस्तान में कोई सरकार नहीं बनाई जानी चाहिए. हालांकि चीन ने मौजूदा हालात की तोहमत अमेरिका के अपने सैनिक अफगानिस्तान से हटाने के फैसला के सिर डाली.

फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, एस्टोनिया, नार्वे समेत सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों ने अफगानिस्तान में बीते कुछ समय के दौरान अफगानिस्तान में बढ़ी हिंसा को लेकर चिंता जताई. साथ ही हिंसा में मासूम नागरिकों, चिकित्सा दलों और यूएन स्टाफ के खिलाफ हुए हमलों की भी निंदा की.

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