पालघर हत्याकांड: लॉकडाउन के बीच अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे थे दोनों साधु

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस हाईलेवल जांच की मांग

मुंबई: लॉकडाउन के बीच अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या करने के बाद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे पालघर सहम गया है.

इस वारदात के बीच कई सुलगते सवालों के जवाबों का इंतजार है. देश कोरोना संकट से जूझ रहा है. लेकिन पालघर में कोरोना के साथ साथ अफवाह का डबल अटैक है. बच्चा चोरी की अफवाह यहां ऐसी फैली कि तीन जिंदगियां खत्म कर दी गईं. हालांकि पुलिस अब एक्शन में है.

वारदात में अब तक 101 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि 9 नाबालिग आरोपियों को जुवेनाइल शेल्टर होम भेजा गया है. लेकिन मामला तूल पकड़ चुका है और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस हाईलेवल जांच की मांग कर रहे हैं.

वारदात की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कड़े शब्दों में निंदा की है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से दोनों संतों की हत्या की जांच और दोषियों के साथ उन पुलिस वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की जो वारदात के वक्त तमाशा देखते रहे थे.

दूसरी ओर राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट कर बताया कि हमला करनेवाले और जिनकी इस हमले में जान गई दोनों अलग-अलग धर्मों से नहीं हैं. पुलिस को बेवजह समाज भेद-भाव पैदा करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं.

सियासत गर्म है. साधु-संतों का गुस्सा भड़का हुआ है. तो दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार भी ये दिखाने बताने की कोशिश में है कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे.

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