पालघर मॉब लिंचिंग : केंद्र ने महाराष्ट्र सरकार से मांगी रिपोर्ट,दो पुलिसकर्मी निलंबित

सांप्रदायिक नहीं है पालघर की घटना : ठाकरे

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ द्वारा तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है। आपको बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उद्धव से बात करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था।

वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की धमकी भी दी है। जानकारी के मुताबिक हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास धरने पर बैठ गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने घटना के संबंध में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

पालघर घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की। मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

 

पालघर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा, ‘हमने दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और मामले की जांच के लिए एडीजी सीआईडी अपराध अतुलचंद्र कुलकर्णी को नियुक्त किया गया है। इस पूरी घटना में कुछ भी सांप्रदायिक नहीं है। मैंने आज सुबह अमित शाह जी से इसपर बात की।

110 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज

आपको बता दें कि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों और 110 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। जिनमें से 101 को 30 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और नौ नाबालिगों को एक किशोर आश्रय गृह में भेज दिया गया है। पालघर के एसपी गौरव सिंह का कहना है कि पलाघर की घटना को लेकर कासा पुलिस थाने के दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। यहां गांववालों ने चोर समझकर तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। गांववालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और 110 को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं अयोध्या में हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास धरने पर बैठ गए हैं। आक्रोशित संतों ने दोषियों के खिलाफ फांसी की मांग की है। हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में धरना देते हुए संतों ने केंद्र सरकार से आरोपियों के साथ-साथ घटना के समय मौजूद पुलिस कर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने पालघर घटना की कड़े शब्दों में निंदा की 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने रविवार को इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और चेतावनी दी कि अगर हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं की गई तो महाराष्ट्र सरकार के विरुद्ध आंदोलन किया जाएगा।  उन्होंने बताया कि पालघर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात कर अखाड़ा परिषद ने अपना विरोध जता दिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।  अगर जिम्मेदार लोगों पर एक्शन नहीं होता है तो लॉकडाउन के बाद साधुओं की फौज महाराष्ट्र कूच करेगी।

काशी दशनाम साधु समाज के पुरुषोत्तम गिरी ने कहा, ‘महाराष्ट्र के पालघर जिले में विशेष समुदाय द्वारा जूना अखाड़े के साधुओं की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की काशी दशनाम साधु समाज घोर निंदा करता है। महाराष्ट्र सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।

फडणवीस ने ट्वीट किया, ‘पालघर में भीड़ हिंसा

दूसरी तरफ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी साधुओं की हत्या पर दुख जताया है और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। फडणवीस ने ट्वीट किया, ‘पालघर में भीड़ हिंसा की घटना का वीडियो हैरान करने वाला और अमानवीय है। ऐसे संकट के समय इस तरह की घटना और भी ज्यादा परेशान करने वाली है। मैं राज्य सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं और जो दोषी हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।’

17 अप्रैल को जूना अखाड़े के दो साधु अपने ड्राइवर के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। तभी पालघर के एक गांव में गांव वालों ने इन्हें डकैत समझ कर पीट-पीट कर मार डाला। ये तीनों मुंबई के कांदिवली इलाके से मारुति ईको कार में सवार होकर सूरत निकले जहां उनके साथी की मौत हो गई थी। दोनो साधुओं को ही उनका अंतिम संस्कार करना था। जब इनकी गाड़ी महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर पर पहुंची तो पुलिस ने उन्हें रोक कर वापस भेज दिया। इसके बाद तीनों ने अंदरूनी जंगल वाले रास्ते से होकर आगे बढ़ना तय किया।

गांवों में फैली अफवाह

इस बीच पालघर जिले के कई गांवों में अफवाह फैल गई कि लॉकडाउन का फायदा उठाकर अपराधी तत्व बैखौफ होकर चोरी डकैती को अंजाम दे रहे हैं। लोगों का अपहरण कर उनकी किडनी निकाल रहे हैं। इस अफवाह के चलते गांव वालों ने बिना कुछ सोचे समझे इनकी गाड़ी देख इन पर हमला कर दिया और गाड़ी को पलट दिया। पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई। पुलिस ने वहां पहुंचकर इन तीनों को अपनी गाड़ी में बैठाया लेकिन गांव वालों की भारी भीड़ के सामने पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम थी, इसलिए तीनों घायलों को छोड़कर पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने इन्हें पीट-पीट कर मार डाला।

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