ज्योतिष

पंच महापुरुष योग। पंच भूत। पंच तत्व लक्षण। यत पिंडे तत ब्रह्माण्डे।

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

भद्र योग।

सबसे पहले ये जान ले की ऋषि पराशर हो या मिहिराचार्य या अन्य विद्वान सबसे पहले ये लिखा है कि पांच तारा ग्रह यदि बलवान होकर, स्वउच्चगत या स्वक्षेत्री होकर केंद्र में हो तो पंच महापुरुष योग बनता है।

यहां पे सबसे पहले इस बात का गोर करे कि सिर्फ स्वग्रही या उच्च का होना ही मुख्य नही है। ऋषि ने साफ साफ लिखा है कि बलवान होना भी जरूरी है मतलब साफ है स्वग्रही या उच्च का होना ही बलवान नही है। इसकी व्याख्या मिहिराचार्य ने साफ साफ की है कि दिक बल, स्थान बल, षडवर्ग बल, काल बल आदि आदि रूप में भी बलवान होना जरूरी है। तो पहले बात तो ये क्लियर हो गयी कि बलवान होने में ओर उच्च का या स्व क्षेत्री होने में बहुत फर्क है। इसके साथ ही ऋषि पराशर ने ये भी साफ साफ लिखा है कि नीच का, अस्त, पाप ग्रहों के साथ या पाप ग्रहों से दृष्ट ग्रह भी पाप फल देगा या निष्क्रिय ही रहेगा। इस बात का प्रतिपादन मिहिराचार्य ने भी किया है।

अब बात करते है भद्र योग की। बुध यदि बलवान होकर केंद्र में स्वग्रही या उच्च का होतो भद्र नाम योग होता है। इस योग में उतपन्न जातंक चीते की तरह फुर्तीला, चौड़ी छाती, हाथी जैसी मस्तानी चाल, मोटे अर्थात मजबूत व घुटने तक लंबे हाथ, बूद्धि मान, चौकोर शरीर, मनोबल से युक्त, योगशास्त्र का जानकार, सात्विक विचार, सुंदर पैरों वाला, हाथ मे शंख, चक्र, बाण, सिंह, झंडा, हल के चिन्ह वाला, सुबदर नाक वाला, निर्णायक शक्ति वाला, अपने लोगो को प्रसन्न करने वाला आदि आदि।

अब चूंकि बुध पृथ्वी तत्व है तो अब इस महाभूत का लक्षण देखिए हमारे ऊपर। जातंक के शरीर से स्वाभिक गन्ध आती है। कपूर व कमल की खुश्बू, भोग को भोगने वाला, सदैव सुखी, बलवान, क्षमा भाव से युक्त, शेर की तरह दबंग आवाज।

अब बुध या भूमि तत्व की क्षाया की बात करते है। शरीर मे सुंदर गन्ध का उदय, त्वचा में कांति, दांतो व नाखून के विशेष चमक, धर्म व अर्थ का लाभ, सुख लाभ होता है।

लगभग यही सब गुण मिहिराचार्य ने कहे है।

चूंकि बुध पृथ्वी तत्व है तो मांस, हड्डी, त्वचा, नशे ओर रोम पे इसका विशेष प्रभाव है। इसीलिए भद्र पुरुष के लक्षण बताये गए है जैसे चौड़ी छाती आदि। ध्यान से पढ़ेंगे तो यही सब शुभ लक्षण दिखेंगे।

केंद्र में उपस्थित इन ग्रहों का लग्न पे पूर्ण प्रभाव है तो ये तो साफ होगा गया कि केंद्र में विद्यमान ग्रह लग्न पे अपना पूर्ण 100% प्रभाव रलहते है और शरीर पे भी इनका पूर्ण प्रभाव रहेगा।

यहां पे जितने भी भद्र पुरुष के लक्षण है सब के सब बुध के कारकत्व से सम्बंधित है। सिर्फ गोर से अध्ययन करने की जरूरत है। चाहे धन हो या रोम हो या वाणी हो या चेहरा।

बुध की प्रधानता मुख्य हो जाएगी हमारे अंदर। भूमि तत्व की प्रधानता मुख्य हो जाएगी हमारे अंदर। हमारे निर्वाण का मार्ग बुध प्रसशत करेगा। मतलब हम बुध को हथियार बनाकर जितना आगे बढ़ेंगे उतना हमारे लिए अच्छा।

अब ये देखिए कि ग्रह तो 5 ही है। तारा ग्रह। सूर्य चन्दर राहु केतु को तो इनके आचार व्यवहार की वजह से ग्रहों की श्रेणी में लिया गया है। पंच तत्व। पंच महाभूत तो 5 तारा ग्रह ही है। इन्ही से तो हमारा निर्माण हुआ है।

जिसलिये नोजवानो अपने अंदर के पंचमहाभूत में से मुख्य तत्व को जानो उसको मजबूत करो और आगे बढ़ो।

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button