पंचायत, नगरीय निकाय में करोड़ों का नुकसान, 28 करोड़ संचित निधि में जमा नही

रायपुर:  रायपुर भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2015-16 का अंकेक्षण प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखा, नमूना जांच में करोड़ों रुपए के नुकसान का आंकलन किया है। प्रतिवेदन में पंचायती राज नगरीय निकायों की दूषित कार्यपद्धती, जवाबदेही, क्रियाविधि और वित्तीय प्रतिवेदित मामलों में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है नमूना जांच में सरगुजा जिले में पंचायती राज संस्थाओं द्वारा वसूली में कमी, योजनाओं एवं वसूली में निगरानी के अभाव में और योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी गंभीर आपत्तियां ली है और शासन का ध्यान आकर्षित किया है।

नगरी निकाय में लगभग 24 लाख किराया वसूली का भाव दुकानदारों को 85 लाख का अनुचित लाभ बिलासपुर नगर निगम में 72 लाख की हानि निकायों में आवंटित राशियों में लगभग सवा करोड़ राजस्व वसूली का अभाव सरगुजा में पंचायती राज में प्लेसमेंट कर्मचारियों पर 1.36 करोड़ अतिरिक्त भुगतान होना संपत्तिकर वसूली नहीं हुई। 88553 भवनों पर करारोपण नहीं हुए। संपत्तिकर में लगभग 14 करोड़ की हानि संभावित है प्रशासनिक कार्य में 9 करोड़ से अधिक व्यय हुआ।

पंचायतों अवरूद्ध (अस्थाई प्रभक्षण) मिले नगरी निकायों द्वारा 27.8 करोड़ संचित निधि में जमा नहीं किए गए। विधानसभा पटल में 187.27 करोड़ के कामकाज की समीक्षा की गई। 8 निकायों की समीक्षा में 8.37 करोड़ संपत्तिकर 10.53 संमेकित कर 17 करोड़ जलकर, 28 करोड़ भाड़ा (किराया), 4 करोड़ विज्ञापन आदि में वसूली नहीं होना पाए गए। पट्टे पर देय राशि के विरुद्ध 2.39 करोड़ कम जमा किया गया। लापरवाही के कारण विद्युत देयक अधिक भुगतान 1.36 करोड़ और विलंब से जमा पर 1.26 करोड़ की क्षति हुई। विकास उपकर का 1.52 करोड़ और अस्थाई अग्रिम 3.59 करोड़ असमायोजित रहे। सरगुजा जिले में मनरेगा में 9.11 करोड़ अधिक व्यय, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान में लगभग 1.25 करोड़ व्यपवर्तन एजेंसियों से 2.07 करोड़ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुए।

छत्तीसगढ़ निर्माण योजना में 5.50 करोड़ अवरुद्ध तथा लगभग 75 लाख का अनियमित भुगतान, इंदिरा आवास योजना में 55 लाख और अवरूद्ध रहें। पाए गए केंद्रांश से 79 लाख की कटौती की गई। पंचायतों में वित्तीय प्रबंधन दोषपूर्ण था संपत्ति कर, प्रकाश कर सहित करारोपण का अभाव रहा। भवन किराया जलाशय लीज वसूली नहीं की गई। चयनित 7 योजनाओं पर वह सीमा 5 से 96 प्रतिशत रहा। सरपंच कर्मचारियों से 3.11 करोड़ अग्रिम बकाया पाया गया। अशासकीय संस्थाओं से 37.05 योजना निधी के कपट पूण आहरण पाया गया। दुकानों के निर्माण कार्य पूर्ण करने में 11 वर्ष से अधिक समय लगा।

निरुपयोगी दुकानों पर लगभग 40.81 लाख निष्फल व्यय के अतिरिक्त दुकानों के आवंटियों से लगभग 1.12 करोड़ के राजस्व वसूली में विफलता नगर नगर निगम रायगढ़ के निष्क्रियता के परिणाम स्वरुप 23.49 लाख किराया वसूल ना किया जाना, दुकानदारों को लगभग 86 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया गया। ईपीएफ के पालन नहीं करने से इसे नगर निगम बिलासपुर को लगभग 72 लाख की हानि और नगर पालिका परिषद जशपुर को लगभग 40 लाख की देयता पाई गई।

केग ने अनुशंसा की है पंचायती राज एवं नगरीय निकाय के संगठन को सशक्त बनाने, करारोपण को सुदृढ़ करने कठोर कदम उठाने तथा योजनाओं के सही एवं शीघ्र क्रियान्वयन के उद्देश्य से उपलब्ध निधि को खर्च करने के लिए उपाय का सुझाव दिया है। निधियों के दुरुपयोग और योजनाओं के मंद क्रियान्वयन, लापरवाही के लिए उत्तरदायी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की अनुशंसा की है। </>

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