जिले के पंचायत प्रतिनिधियों की राजस्थान से हुई वापसी

ग्राम पीपलांत्री की तर्ज पर अपने-अपने पंचायतों में विकास की संकल्पना को करे साकार - कलेक्टर

दुर्गानाथ देवांगन

कोण्डागांव।

बस्तर की पहचान यहां के निवासियों के आत्मसम्मान, अदम्य स्वाभिमान, संवेदनशीलता से होती है। बस्तर की विशिष्ट संस्कृति, रहन-सहन, वनों की समृद्धि को पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा राजस्थान में कुशलतापूर्वक उजागर किया गया। यही पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और इसके लिए वे साधुवाद के पात्र है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम बस्तर की विपुल वन सम्पदा को सहेजे। इसके लिए हमें पीपलांत्री ग्राम पंचायत से प्रेरणा लेकर अपने-अपने पंचायतों को भी पर्यावरण के प्रति जागरुक होगा।

03 सितम्बर को कोंडागांव नगर में रजबंधा सरोवर तालाब के समीप स्थित गार्डन में जिले के पंचायत प्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों की पिपलांत्री (राजस्थान) से वापसी होने पर एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।

इस मौके पर कलेक्टर नीलकंठ टीकाम द्वारा उक्त उद्गार व्यक्त किए गए। ज्ञात हो कि 23 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर से जिले के 150 पंचायत प्रतिनिधियों को राजस्थान के राजसमंद जिला के लिए जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम द्वारा रवाना किया गया था।

जहां प्रतिनिधियों ने राजस्थान के जिला-राजसमंद के विश्व विख्यात ग्राम पंचायत पीपलांत्री के बहुआयामी कार्यप्रणाली का निरीक्षण भ्रमण किया। इसी दौरान ग्राम पीपलांत्री में रक्षाबंधन के अवसर पर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ। कलेक्टर ने बस्तर में बालिकाओं की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां बेटियो को श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है और बेटियों का पैदा होना परिवार के लिए गौरव का विषय होता है। यह भी बस्तर की विशिष्ट संस्कृति है।

इस मौके पर प्रख्यात समाज सेवी पदमश्री धरमपाल सैनी ने संबोधन करते हुए कहा कि बस्तर में बहुआयामी विकास से अब यह पिछड़ा क्षेत्र नहीं रहा। यहां के समेकित विकास से इस बदलाव को साफ-साफ देखा समझा जा सकता है। छोटी-छोटी योजनाओं से कैसे यहां के लोगो का जीवन स्तर बदला है यह बीजापुर से लेकर दंतेवाड़ा तक महसूस किया जा रहा है।

शासन द्वारा विगत् वर्षो में एक से बढ़कर एक फैसले लिए गए। यहां शिक्षा का ऐसा जाल बिछा कि दंतेवाड़ा का जांवगा ग्राम एक एजुकेशन हब बन गया है। स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, आवास जैसी बुनियादी जरुरतो की सारी सुविधा शासन द्वारा पहुंचाई गई है। कार्यक्रम में प्रतिनिधियों ने भी अपने यात्रा के अनुभवों को साझा किया उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत पीपलांत्री में एक बालिका के जन्म होने पर 111 पेड़ लगाये जाते है इस तरह इस ग्राम पंचायत में अब तक 4 लाख पेड़ लगाये जा चुके है और प्रत्येक रक्षाबंधन को बालिकाऐं पेड़ों को राखी बांधती है। मौके पर ग्राम लंजोड़ा की जनप्रतिनिधि श्रीमती संगीता ने अपने दो बच्चियों के नाम पर 222 पौधे लगाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी जनप्रतिनिधियों को पौधे एव शाल देकर सम्मानित किया गया तथा मौके पर ही स्वीप कार्यक्रम के तहत मतदाता जागरुकता के अंतर्गत ईव्हीएम एवं व्ही.व्ही.पैट मशीन की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस अवसर पर वनमण्डलाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव, एसडीएम टेकचंद अग्रवाल, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी.एस.सोरी, सांसद प्रतिनिधि दिनेश चैरड़िया, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हरिसिंह सिदार, बंगाराम सोरी, जीवन नाग आदि उपस्थित थे.

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