पाण्डुका : अवैध डामर प्लांट के प्रदूषण से लोग परेशान

हितेश दीक्षित

छुरा/गरियाबंद।

पिछले सालभर पूर्व विवाद में रहने वाला अवैध रूप से सरकारी भूमि पर संचालित पाण्डुका स्थित डामर प्लांट विवादों में है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह जमीन सीआरपीएफ बटालियन के लिए आरक्षित किया गया था जिसे डामर प्लांट ठेकेदार मनीष पवार कुरूद निवासी को ग्राम पंचायत पाण्डुका द्वारा तीन साल लीज में नियम कानून की धज्जीयां उड़ाते हुए दिया गया था।

यह जमीन राजस्व विभाग की है जिसमें ठेकेदार ने अपना प्लांट लगाया है। और इससे निकलने वाले धुंए से स्कुली छात्र-छात्राएं सहित लोग परेशान है। पाण्डुका थाना के पिछे लगे इस प्लांट की शिकायत के बाद पूर्व में नायब तहसीलदार छुरा चंद्रशेखर मंडावी ने मौके में पंहुचकर जांच किया था और अवैध संचालित प्लांट को बंद करने
का आदेश दिया गया था पर ठेकादार सरकारी आदेश का परवाह किए बगैर राजनितिक संरक्षण की वजह से
अपना काम जारी रखा हुआ है।

बता दे की डामर प्लांट के आसपास प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पाण्डुका, हाईस्कुल पोंड़ एवं पाण्डुका सहित वन परिक्षेत्र कार्यालय थाना परिसर, जल संसाधन कार्यालय, धान खरीदी केन्द्र और पैरी
कॉलोनी पाण्डुका सहित आसपास राहगीरो को इस प्लांट से निकलने वाली जहरीली गैस, गंदगी
और बदबू से ग्रामीण परेशान है।

ग्राम पंचायत सचिव विष्णु साहू ने बताया कि सरकारी जमीन पर काबिज डामर प्लांट को हटाने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा तीन बार नोटिस दिया गया है जिसमें जांच में आए तहसीलदार द्वारा हार्डमिक्स प्लांट पाण्डुका को स्थायी रूप से बंद करने का प्रस्ताव भी ग्राम पंचायत द्वारा दिया गया है।

जिसमें पर्यावरण और लोगो को विभिन्न प्रकार की बीमारी एवं अनेक प्रकार की रोगो के प्रकोप से हानि हो रही है, साथ ही नियमानुसार ठेकादार द्वारा कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। जिसे देखते हुए इसे बंद कराने के लिए
थाना प्रभारी पाण्डुका, तहसील कार्यालय छुरा, मुख्यकार्यपालन अधिकारी छुरा एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गरियाबंद को सूचना दिया गया है पर ठेकादार हटने का नाम नहीं ले रहा है।

इस तरह ठेकेदार मनीष पवार के मनमानी से लोग एवं स्कूली छात्र-छात्राओं सहित लोग सभी परेशान है व कुछ लोगो की संरक्षण में अवैधा रूप से प्लांट संचालित कर रहा है।

वही इस बारे में ठेकेदार मनीष पवार ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा मुझे तीन साल के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। मेरा समय पूरा नहीं हुआ है, सूत्रो की माने तो इस जमीन के आबंटन में लेने-देन एवं मिलीभगत की आशंका जाहिर की जा रही है।

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