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फिल्म ‘बधाई हो’ पर परितोष चक्रवर्ती की रिट याचिका को उच्च न्यायालय बिलासपुर ने संज्ञान में लिया

करीब 20 वर्ष पूर्व कथाकार परितोष चक्रवर्ती की कहानियों का संग्रह घर बुनते हुए का प्रकाशन सन् 1999 में सारांश प्रकाशन (नई दिल्ली) ने किया था। उपरोक्त कहानी संग्रह में परितोष चक्रवर्ती की सात कहानियों का प्रकाशन किया गया था, जिसमे जड़ नामक कहानी भी छपी थी। इससे पहले जड़ कहानी एबीपी ग्रुप की बांग्ला पत्रिका सानंदा एवं हिन्दी साहित्यिक पत्रिका कादम्बिनी में भी 1998 में प्रकाशित हो चुकी है। 19 अक्टूबर 2018 को रिलीज हिन्दी फीचर फिल्म ‘बधाई हो’ उनकी कहानी जड़ पर आधारित है। मूल लेखक परितोष चक्रवर्ती के बिना अनुमति के जंगली और क्रोम द्वारा फिल्म बनाई गई है।

पता चलने पर परितोष चक्रवर्ती ने फिल्म प्रोडक्शन हाऊस के खिलाफ रायपुर के पंडरी थाना में अक्टूबर 2018 को एफ.आई.आर. दर्ज करने हेतु लिखित में शिकायत की थी, जिस पर पुलिस ने अभी तक एफ.आई.आर. दर्ज नहीं किया। जिससे क्षुब्ध होकर लेखक परितोष चक्रवर्ती ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में एडव्होकेट विवेक चोपड़ा के माध्यम से रिट याचिका लगाई थी। जिस पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश गौतम भादुड़ी की एकलपीठ ने 7 मार्च 2019 को सुनवाई की। कोर्ट ने प्रस्तावित अभियुक्तों फिल्म के निर्माता श्री विनीत जैन मुम्बई, आलिया सेन मुम्बई और श्री हेमंत भंडारी मुम्बई, निर्देशक श्री अमित रविन्द्रनाथ शर्मा मुम्बई, स्क्रीन प्ले लेखक श्री अक्षत घिलडियाल मुम्बई, मूल कथा श्री शांतनु श्रीवास्तव मुम्बई एवं मोवा थाना प्रभारी, रायपुर को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। प्रस्तावित अभियुक्तों को नोटिस जारी कर कोर्ट ने लिखा है कि क्यों न आपके विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की जावें और मोवा थाना प्रभारी से पूछा गया है कि अब तक इस मामले में आपके द्वारा क्या कार्यवाही की गई है और एफ.आई.आर. दर्ज क्यों नहीं की गई है।

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