छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में पार्टी का रिमोट कण्ट्रोल नंदकुमार बघेल के पास

रायपुर : राज्यसभा चुनाव को लेकर हमे पार्टी ने जो नोटिस दिया है, उस नोटिस का कोई औचित्य नहीं है। ये कागज़ का टुकड़ा है और मगरमच्छ का दुखड़ा है और कुछ नहीं। ये नोटिस “प्रदेश कांग्रेस कमिटी” ने नहीं बल्कि “बघेल एंड संस कंपनी ” ने भेजा है। ये वो कंपनी है जो कांग्रेस पार्टी को अपनी बपौती समझ कर चला रही है। वैसे, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बची ही कहाँ है। कांग्रेस का नकाब ओढ़े तो “बघेल एंड संस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” चल रही है। रायपुर का गांधी भवन तो कंपनी का केवल रजिस्टर्ड ऑफिस है। मेन ऑफिस तो भिलाई-३ है। छत्तीसगढ़ में पार्टी का रिमोट कण्ट्रोल नंदकुमार बघेल के पास है।

नंदकुमार बघेल अपने सन को सीएम बनाने के लिए किसको टिकिट देना है और किसको नहीं देना है, ये तय कर रहे हैं और दिल्ली में बैठा कांग्रेस पार्टी का असली मुखिया धृतराष्ट्र बना बैठा है और ट्विटर में पार्टी को चला कर ही खुश है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का कटु सत्य मीडिया और छत्तीसगढ़ की जनता बखूबी जानते हैं कि भाजपा को सत्ता खोने का डर सिर्फ और सिर्फ जोगी से है। भाजपा को अच्छे से ज्ञात है कि उसका असली मुकाबला जोगी से ही होगा और सीधे मुकाबले में भाजपा की हार होना तय है। यही कारण है कि जब जनहित सम्बंधित मुद्दों पर भाजपा घिरती है तो अपनी दो नली वाली बंदूक यानि सिंघदेव और भूपेश को खुला छोड़ देती है जोगी जाप करने और मुद्दों से ध्यान हटाने।

केवल जोगी को सत्ता में आने से रोकने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को भाजपा के हाथों बेचा जा चुका है। राहुल गांधी जी भी यही चाहते हैं कि भाजपा जीत जाए लेकिन जोगी को नहीं जीतना चाहिए। पहले कर्नाटक से इम्पोर्टेड नेता बीके हरिप्रसाद ने कांग्रेस को बर्बाद किया और अब उत्तर प्रदेश से इम्पोर्टैंड नेता पुनिया भी उसी रंग में रंग चुके हैं। हमे व्हिप के विरुद्ध जाने के लिए नोटिस दिया गया है। हम पुनिया से पूछते हैं, क्या चुनाव पूर्व आपने हमसे संपर्क किया ? हम तो फिर भी लेखराम साहू को समर्थन देने के लिए तैयार थे लेकिन आप ने ठीक चुनाव पूर्व, हमारे और पूरे छत्तीसगढ़ के आदर्श और लोक्रप्रिय नेता माननीय जोगी के लिए जो अपशब्द कहे, उसके बाद तो आपके किसी भी प्रत्याशी को समर्थन देने का प्रश्न ही नहीं उठता था।

राजनीति में संस्कार और मर्यादा से बड़ा कोई व्हिप नहीं होता। सम्मानीय जोगी के विरुद्ध आपने तो भाषा की मर्यादा पार कर राजनीति का ही व्हिप तोड़ दिया और हमे पार्टी की व्हिप तोड़ने का नोटिस भेज रहे हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि पुनिया छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के निर्माण के विषय में बात करने के बजाय, रमन सिंह के विरुद्ध बोलने के बजाय जोगी के विरुद्ध अनर्गल बयानबाजी करते हैं। ऐसा लगता है मानो पुनिया दिल्ली के भाजपा मुख्यालयः होकर छत्तीसगढ़ आते हैं। तभी तो, आते ही रमन सिंह को छोड़कर जोगी के विरुद्ध तंज कसने और अनर्गल ब्यानबाजी करके वापस जाते हैं। शायद उन्हें भी बीके हरिप्रसाद की तरह अमित शाह से कमीशन अच्छा मिल रहा होगा।

छत्तीसगढ़ की राजनितिक तस्वीर बिलकुल साफ है। एक तरफ जनता और जोगी हैं और दूसरी ओर भाजपा और जोगी विरोधी हैं। कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कहीं है ही नहीं। कांग्रेस तो अब केवल दिल्ली में 24 अकबर रोड में है। कांग्रेस के पतन के मुख्यतः तीन कारण है – १) नेता फुल, कार्यकर्ता गुल २) भाजपा से सेटिंग कर जोगी केंद्रित राजनीति और ३) नंदकुमार बघेल के हाथ में रिमोट कंट्रोल। पार्टी के जिन नेताओं को ये बात समझ में आ चुकी है वो आज नहीं तो कल पार्टी छोड़ेंगे और जिन्हे नहीं आयी है वो चुनाव के बाद राजनीति छोड़ेंगे।

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