नर्सिंग छात्राओं के हाथ में मरीजों की जान

दवा देने और इंजेक्शन लगाने में आ रही समस्या

भरत ठाकुर

बिलासपुर। नर्सों की अनिश्तिकालीन हड़ताल का असर सिम्स की चिकित्सकीय व्यवस्था पर पड़ा। 180 नर्सों की अनुपस्थिति में मरीजों की जान नर्सिंग की छात्राओं के हाथ में दे दी गई है। छत्तीसगढ़ परिचारिका कर्मचारी कल्याण संघ के बैनर तले रायपुर में चल रही हड़ताल का रविवार को तीसरा दिन था। सिम्स की 232 नर्सों में से 180 हड़ताल में शामिल हैं, वहीं 20 छुट्टी में चल रही हैं। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रही 150 छात्राओं को मरीजों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

ये छात्राएं गंभीर मरीजों को संभालने में कतरा रही हैं। अनुभव नहीं होने से उन्हें दिक्कत हो रही है। खासतौर दवा देने और इंजेक्शन लगाने में समस्या आ रही है। छात्राओं की छोटी सी चूक का भी गंभीर परिणाम सामने आ सकता है।

ये हैं मांगें

नर्सें ग्रेड दो का दर्जा और सातवां वेतनमान 4600 ग्रेड पे की मांग कर रही हैं। संघ ने साफ किया है कि दोनों मांग पूरी होने तक हड़ताल चलती रहेगी। आने वाले दिनों में चिकित्सकीय व्यवस्था और बिगड़ सकती है।

ओपीडी भी प्रभावित

सिम्स में हड़ताल पर नहीं जाने वाली सभी वरिष्ठ नर्सों की ड्यूटी आईसीयू व अन्य संवेदनशील वार्डों में लगाई गई है। ऐसे में ओपीडी में भी नर्सिंग की छात्राएं काम संभाल रही हैं। मरीजों को इंजेक्शन व मरहम-पट्टी के लिए भटकना पड़ रहे हैं।

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