झीरम घाटी घटना में शहीद हुए कांग्रेस नेताओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी

अरविन्द शर्मा:

कोरबा:- जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ने शहीद स्मारक स्थल कोरबा में झीरम घाटी घटना में शहीद हुए कांग्रेस नेताओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर महापौर राजकिशोर प्रसाद ने झीरम घाटी घटनाक्रम को बड़ी चूक बताते हुए कहा कि इस दौरान हमने अनेक कांग्रेस नेताओं को हमेशा के लिए खो दिया। उनकी शहादत से जो स्थान रिक्त हुआ है उसकी भरपाई मुश्किल है। उन्होने कहा कि नक्सल विचारधारा का अंत होना ही छत्तीसगढ़ के हित में है। 25 मई 2013 को हुई घटना ने सभी कार्यकताओं को हिलाकर रख दिया था। अब हमें दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सपना चौहान ने झीरम हादसे को आजाद भारत की सबसे बड़ी वारदात बताया जिसमें तत्कालिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार, दिनेश पटेल, योगेन्द्र शर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेता व सुरक्षा कर्मी शहीद हो गये। इस घटना ने राज्य की भाजपा सरकार की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी थी। सभापति श्यामसुंदर सोनी ने कहा झीरम घटना भाजपा के साजिश का हिस्सा था तत्कालिन प्रदेश सरकार द्वारा इस घटना की जॉच नही कराने के कारण कई प्रकार के सवाल खड़े होने स्वाभाविक है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी ने कहा कि आठ वर्ष पहले जब यह घटना हुई, कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक वातावरण बन रहा था। संभावित नतीजों का जानकार इस तरह का जाल बुना गया जिससे छत्तीसगढ़ की राजनीति दागदार हो गई। प्रदेश सचिव एवं पार्षद सुरेन्द्र प्रताप जायसवाल ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह सबसे बड़ा माओवादी हमला था और राजनेताओं की हत्या की दृष्टि से भी यह सबसे बड़ा था।

पूर्व सभापति एवं पार्षद संतोष राठौर का कहना था कि कांग्रेस नेताओं की शहादत कभी भी व्यर्थ नही जाएगी और इसके परिणाम नए सूर्योदय के रूप में सामने आएंगे। अल्प संख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मो. शाहिद, पार्षद धरम निर्मले, एल्डरमेन बच्चु मखवानी, सुरेश पटेल, बनवारी पाहुजा, बाबा खान, विमल थवाईत आदि ने कहा कि नक्सलियों की गोलियों ने उन परिवारों को अनाथ कर दिया जिनके चेहरे देखकर बच्चे विश्वास के साथ बड़े हो रहे थे। उन शहीदों के सपनों को पुरा करने का हम सब का कर्तव्य है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद नेताओं के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया गया तत्पश्चात् शहीद नेताओं की याद में दो मिनट का मौन रखकर उन्हे श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सीमित पदाधिकारियों की उपस्थिति में मनाया गया।

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