पेगासस जासूसी मामला: सरकार बदलने के तुरंत बाद बीटीआई ग्राउंड में जलाए गए थे दस्तावेज

जांच कमेटी को अब तक इससे जुड़ा एक भी दस्तावेज नहीं मिल पाया

रायपुर: पेगासस जासूसी कांड को लेकर कुछ नए तथ्य सामने आ गए हैं, जिनसे शासन में हड़कंप मचा हुआ है। अफसरों की जांच टीम मोटे तौर पर इस नतीजे पर पहुंच गई है कि दिसंबर 2018 में सरकार बदलने के तुरंत बाद बीटीआई ग्राउंड में जो दस्तावेज जलाए गए थे, उनमें पेगासस जासूसी से जुड़े कागज भी होने की आशंका है। यही वजह है कि जांच कमेटी को अब तक इससे जुड़ा एक भी दस्तावेज नहीं मिल पाया, जबकि यह पुख्ता सूचना है कि इजराइली कंपनी और यहां के कुछ अफसरों में ई-मेल के जरिए संपर्क हुआ था।

अब तकनीकी तौर पर इन ई-मेल की तलाश भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश में 2018 में सरकार बदली और नई भूपेश सरकार ने आते ही इजरायलियों के 2017 में यहां साफ्टवेयर लेकर आने की सूचना की जांच के आदेश दिए थे। तब पेगासस जासूसी मामले का खुलासा नहीं हुआ था। सरकार ने जांच के लिए तीन आला अफसरों की कमेटी बनाई थी।

बीटीआई ग्राउंड में कुछ दस्तावेज जलाए गए थे

इसके कुछ ही दिन बाद बीटीआई ग्राउंड में कुछ दस्तावेज जलाए गए थे, जिनके बारे में कहा जा रहा था कि ये कागजात राज्य विशेष शाखा (एसआईबी) के थे। लेकिन जांच का दूसरा बिंदु यह था कि इनमें चिप्स के जासूसी से जुड़े दस्तावेज तो नहीं थे? इनके अलावा जांच के अन्य बिंदुओं में छत्तीसगढ़ आए इजराइली नागरिकों के नाम और अन्य जानकारी तथा किनके व्हाट्सअप और मोबाइल फोन टैप किए गए आदि शामिल थे।

यह जांच अब भी जारी है। सूत्रों ने बताया कि जांच कमेटी पेगासस से जुड़े दस्तावेज हासिल करने में नाकाम रही, लेकिन सारे जांच अफसर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर इस बात से सहमत हैं कि जो दस्तावेज जलाए गए, उनमें पेगासस से जुड़े दस्तावेज भी थे। कमेटी इस बिंदु को अपनी रिपोर्ट में शामिल करने जा रही है।

60 करोड़ रुपए मांगे थे कंपनी ने

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इजरायली कंपनी के प्रतिनिधियों ने पेगासस साफ्टवेयर के बारे में पुलिस मुख्यालय में दिए गए प्रजेंटेशन में इसके उपयोग की विस्तार से जानकारी दी थी। सूत्रों के मुताबिक प्रजेंटेशन देने वाले प्रतिनिधियों ने साफ्टवेयर की जानकारी देते हुए बताया था कि उनका एप अन्य बातों के अलावा दो लोगों के बीच की बातचीत यानी एन्क्रिप्टेड फाइलों को परिवर्तित कर सामने ला सकता है।

यही नहीं, इसके जरिए व्हाट्सएप वॉयस कॉल भी आसानी से सुनी जा सकती है। इस साफ्टवेयर के लिए कंपनी ने 60 करोड़ रुपए की डिमांड की थी। कमेटी को इस बात की जांच करने के लिए भी कहा गया है कि इसके बाद डील हुई या नहीं? साफ्टवेयर आया या नहीं? कितने और किस-किस क्षेत्र के लोगों की जासूसी की गई वगैरह।

छत्तीसगढ़ में सात एक्टिविस्ट की भी जासूसी

पेगासस में हुए नए खुलासे में छत्तीसगढ़ से सात ऐसे लोगों के नाम आ रहे हैं, जिनकी जासूसी की गई थी। ये सभी एक्टिविस्ट हैं और बस्तर में वर्षों से सक्रिय रहे हैं। इनके नाम शुभ्रांशु चौधरी, बेला भाटिया, आलोक शुक्ला, शालिनी गेरा, सोनी सोरी, डिग्री प्रसाद चौहान और लिंगाराम कोडोपी शामिल हैं। ये सभी नाम हाल में फूटी पेगासस की सूची में शामिल बताए गए हैं। अफसरों का कहना है कि इससे इस बात को बल मिल गया है कि छत्तीसगढ़ में भी पेगासस साफ्टवेयर का उपयोग किया गया था।

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