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ना खाता ना बही फिर भी इस मंदिर में लोग जमा करा जाते हैं आभूषण और रुपये

नई दिल्ली: ना खाता ना बही बस भक्त आए, नोटों की गड्डियां, जेवर, कीमती सामान चढ़ाए, रजिस्टर में नाम, पता नोट कर एक टोकन आगे बढ़ाया. भक्त ने टोकन लिया, हाथ जोड़े और चल दिए. उनके पीछे दूसरे लोग भी नोटों की गड्डियां लिए खड़े हैं. यह नजारा दिखता है मध्यप्रदेश के रतलाम के माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर का, जो दीपोत्सव में भक्तों की तिजोरी बन जाएगा. ये लोग भाईदूज के दिन आएंगे और टोकन देकर अपना धन ले जाएंगे.

मंदिर सजना शुरू हो गया है
महालक्ष्मी मंदिर बेशकीमती जेवरों और लाखों के नोटों से सजना शुरू हो गया है. मंदिर को करोड़ों के नोटों से बने खास वंदनवार से सजाया गया है. लक्ष्मीजी के चरणों में रखने के लिए लोग नोट, सोने-चांदी के आभूषण और हीरे-जवाहरात सब लाते हैं. दीपोत्सव से पहले मंदिर ऐसे ही आभूषण और नोटों से सजता है, भाईदूज से भक्तों की भेंट उन्हें वापस मिलती है. मंदिर के सेवादार अनिल बैरागी, ने बताया चार दिन पहले से पैसे जमा करना शुरू करते है और भाई दूज पर ले जाते हैं. हमने सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे लगाए हुए हैं और हमारे साथ हमारे सदस्यों के साथ पुलिसकर्मी भी है.अधिकारी भी आते हैं निरीक्षण करने. मंदिर की सुरक्षा में पुलिस पूरी मुस्तैदी से तैनात है.

एएसपी प्रदीप सिंह ने कहा कि रकम बहुत ज्यादा होती है और सोने चांदी से इसे सजाया जाता है. एहतियातन पुलिस गार्ड लगाए गए हैं और सीसीटीवी पर मॉनिटरिंग की जाती है. हर घंटे देखा जाता है की सुरक्षाकर्मी मौजूद है की नहीं. लोग मानते हैं कि महालक्ष्मी के चरणों में पैसा-जेवर रखने से उनके घर कारोबार में बरकत होगी. मंदिर के पुजारी संजय ने कहा यहां एक रुपये से लेकर हज़ार रुपये तक के नोट, हीरे, सोना-चांदी सब मां के चरणों में ऐसे ही रख देते हैं. माता के चरणों में पैसा रखने दूर-दूर से भक्त आने लगे हैं. कितना पैसा है यह कोई नहीं जानता. अब इतने भक्त आ गए हैं कि हमें उन्हें ना कहना पड़ रहा है. हमारे पास पैसे रखने की जगह ही नहीं बची.

मंदिर में पिछले 6 साल से आ रहे श्रद्धालु ममता पोरवाल ने कहा यहां नोट रखते हैं उससे हमारे यहां बरकत होती है. हमारी जो भी इच्छा होती है वह यहां पूरी होती है. रतलाम में महालक्ष्मी के दरबार में चांदी के हाथी भी सजेंगे, मंदिर में सोने-चांदी के ईंट, जेवरात, 1 से लेकर 2000 तक के नोट, चांदी के पांच हाथी शृंगार सामग्री के रूप में आए.

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