ज्योतिष

इन राशि वालों को रहना होगा सावधान

 ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

कुम्भ, मिथुन और तुला राशि वालों को रहना होगा सावधान  – शनि बदल रहे हैं राशि 2020

जन्म राशि से गोचर में शनि द्वादश भाव में आता है तब साढ़ेसाती प्रारंभ होती है। यह साढ़ेसाती का प्रथम चरण कहलाता है। जन्मराशि अर्थात चन्द्र पर शनि के गोचर का काल साढ़ेसाती का दूसरा चरण और जन्मराशि से द्वितीय भाव में गोचरस्थ शनि का प्रवेश काल तृतीय चरण कहलाता है। इन राशियों में शनि करीब ढाई- ढाई वर्ष रहता है और तीन राशियों में साढ़ेसात। यही साढ़े सात साल साढ़ेसाती के नाम से जाने जाते है। साढ़ेसाती का प्रभाव सात वर्ष एवं ढैय्या का प्रभाव  ढाई वर्ष रहता है।

सामान्यतया साढ़ेसाती मनुष्य के जीवन में तीन बार आती है। परन्तु जिनकी आयु 90 वर्ष से अधिक हो उनके जीवन में  शनि साढ़ेसाती का चार बार आगमन होता है। प्रथम बचपन में द्वितीय युवावस्था में तथा तृतीय वृद्धावस्था में तथा चतुर्थ का 90 वर्ष की आयु के बाद।  प्रथम साढ़ेसाती का प्रभाव शिक्षा एवं माता-पिता तथा भाई-बहनों पर पड़ता है। द्वितीय साढ़ेसाती का प्रभाव कार्यक्षेत्र, आर्थिक स्थिति एवं परिवार पर पड़ता है। परन्तु तृतीय साढ़ेसाती स्वास्थ्य पर अधिक प्रभाव करती है। जिन व्यक्तियों को चतुर्थ साढ़ेसाती का प्रभाव मिलता हैं। उन्हें साढ़ेसाती मोक्ष प्रदान करती है।

साढ़ेसाती का प्रभाव आपके जीवन में शुभफलकारी और अशुभफलकारी हो सकता है। इस अवधि में आपको जीवन के अनेक नवीन अनुभव सिखने को मिलेंगे। इस अवधि में आपको सामान्य से अधिक संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। व् इस अवधि में आपके रोगग्रस्त होने की संभावनाएं बढ़ जायेंगी। अनेक बार असफलताओं का सामना भी करना पडेगा। यह आवश्यक नहीं है की यह सारी अवधि एक जैसी हो, यह समय उतार-चढाव वाला भी हो सकता है। इसे उपायों से कम कष्टपूर्ण बनाया जा सकता है। जिससे इसके परिणाम सामान्य व् शुभ होंगे।

धनु राशि के लिए – अंतिम चरण

24 जनवरी 2020 से शनि आपकी जन्मराशि से द्वितीय भाव पर गोचर करने लगेंगे। इस अवधि से आपकी जन्मराशि का अंतिम चरण प्रभावी हो जाएगा। शनि साढ़ेसाती की यह अंतिम ढैय्या आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगी। शनि स्वराशि मकर राशि में होंगे। इस समय में शनि की तीसरी दृष्टि चतुर्थ भाव पर होगी जो गुरु की मीन राशि होगी। सप्तम दृष्टि अष्टम भाव में स्थिति चंद्र की कर्क राशि पर होगी तथा दशम दृष्टि एकादश भाव में स्थित शुक्र की तुला राशि पर होगी, जो कि शनि की मित्र राशि है।

अत: इस समय जातक को पराक्रम और परिश्रम से नौकरी-व्यापार में सफलाअ और इज्जत-मान की प्राप्ति होती है और समाज में भी इज्जत, मान-सम्मान मिलता है। परिवार वाले और दूसरे लोग आपको हानि पहुंचाने का विचार बना सकते है। परिवार में भी समस्याएं उत्पन्न होती है। जमीन-जायदाद से लाभ प्राप्त हो सकता है। मन अशांत रहता है, दुर्घटनाओं का भय रहता है। स्वभाव में जिद्द होती और धन की हानि के योग बनते है। संपत्ति को लेकर विवाद सामने आते हैं।

इस अवधि में मेहनत का फल आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर आपके मनोबल को बढ़ाएगा। अपने सामर्थ्य से अधिक मेहनत आप को करनी पड़ सकती है। इसके अलावा परिवार में शुभ सूचना आने से, शुभ कार्यक्रम पूर्ण हो सकते है। परिवार में ख़ुशी और उल्लास का माहौल आपको प्रसन्न रख सकता है। फिर भी इस अवधि में आप दीर्घकालीन रोगों से अपना बचाव रखें। भूमि-भवन के क्रय-विक्रय की योजनाएं क्रियान्वित होंगी। तथा भौतिक सुखों का लाभ प्राप्त करने के लिए भी समय की शुभता रहेगी। इस समय में आप अपनी माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आशा के विपरीत कुछ क्षेत्रों से लाभ प्राप्त हो सकते है। पैतृक सम्पति प्राप्ति की संभावनाएं इस समय में बन सकती है। इस समय में आपकी धार्मिक गतिविधियों मंभ रूचि बढ़ सकती है।

मकर राशि के लिए – द्वितीय चरण

24 जनवरी 2020 से शनि मकर राशि पर गोचर करने लगेंगे, तब से मकर राशि पर शनि साढेसाती का मध्यम चरण अर्थात द्वितीय चरण प्रभावी होगा। आप पर साढ़ेसाती का प्रभाव २०२५ तक रहेगा। शनि की दृष्टि तीसरे भाव पर होगी जो गुरु की मीन राशि पर होगी। सप्तम दृष्टि सप्तम भाव में स्थित कर्क राशि पर होगी जो शनि देव की शत्रु राशि है तथा दशम दृष्टि दशम भाव में स्थिति तुला राशि पर होगी जो शनि की मित्र ग्रह की राशि है। शनि गोचर की यह ढाई साल की अवधि आपके लिए मिला-जुला फल देगी।

आप पराक्रमी और मेहनती होंगे। अपना कुछ समय खुशी के कामों में व्यतीत करने का प्रयास करेंगे। मेहनत से अपने कार्यों को सफलता की ओर बढ़ाएंगे। गलतियां होने की संभावनाएं भी बनती है। क्रोध में अपना अहित करने के योग भी बन रहे हैं। इस समय में आपकी कुछ नई मित्रताएं शुरू होकर, समाप्त हो सकती है।  मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त न हो यह भी संभावित है। शनि की यह स्थिति कुछ समय के लिए आपके स्वास्थ्य में कमी का कारण बन सकती है। इस अवधि में आपको मेहनत के अनुसार फल प्राप्त होंगे। आपके प्रयास करने से स्थिति में सुधर होकर, समय की अशुभता में कमी भी हो सकती है। इस अवधि में रोगों के प्रभाव में कमी करने के लिए आपको उपचार और परहेज दोनॊ के नियमों का पालन करना होगा। बड़े भाई बहनों के सहयोग से शिक्षा कार्योंमें शुभता बनी रहेगी। पारिवारिक सुख, कुटुंब और बातचीत में मधुरता का प्रयोग कर आप अपने सम्बन्धों में सुधर कर सकते हैं। इस अवधि में आपकी सत्यवादिता में वृद्धि होगी। दूसरों को धोखा देने से आप बचेंगे। तथा इस समय में आप को अपने परिवार के साथ यात्रा करने के अवसर प्राप्त हो सकते है।

उपाय – घर में ग्रह पीडा निवारक शनि यंत्र लगाकर शनि स्तोत्र का जाप करें।

कुम्भ राशि के लिए – प्रथम चरण

24 जनवरी 2020 से आपकी जन्मराशि की साढ़ेसाती शुरु हो जाएगी। शनि इस समय में कुम्भ राशि से द्वादश भाव पर होंगे। इस स्मय शनि देव की तृतीय दृष्टि  द्वितीय भाव पर होगी जो शनि देव के शत्रु गुरु की मीन राशि है। सप्तम दृष्टि छ्ठे भाव में चंद्र की कर्क राश्हि पर होगी जो शनि देव की शत्रु राशि है तथा दशम दृष्टि नवम भाव पर होगी जो शुक्र की तुला राशि है और शनि देव के मित्र की राशि है। शनि साढ़ेसाती का प्रथम चरण फल आपके लिए मिश्रित रहेगा। शनि के इस ढाई साल में आपको कुछ विषयों पर शुभ और कुछ विषयों पर अशुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।

अत: इस समय शारीरिक और मानसिक दृष्टि से थका हुआ महसूस करेंगे। क्रोध और बोल चाल में कड़वाहट हो सकती है। नौकरी व्यापार में बदल सकती है। किसी धार्मिक कार्यों को न करके आप नीच कार्यों में संलग्न हो सकते है। जमीन-जायदाद या किसी गुप्त विद्या को सीखने के लिए उसमें समय नष्ट कर सकते है। परिवार व ससुराल वलओं से लाभ की प्राप्ति हो सकती है। दूसरी स्त्रियों में रुचि हो सकती है। घर से दूर रहना पड़ सकता है। नई योजनाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। सरकारी दंड की स्थिति बन सकती है। अस्पताल की स्थिति भी बन सकती हैं। कई क्षेत्रों से एक साथ विपरीत परिणाम प्राप्त होने से आप में कुछ समय के लिए निराशा का भाव आ सकता हैं। तथा स्वास्थ्य में गिरावट से आप चिंतित हो सकते हैं। स्वयं को सकारात्मक बनाए रखने के लिए आप धर्म और अध्यात्म का सहारा ले सकते हैं।

उपाय – शनिवार व्रत का पालन करें। शनि ग्रह के व्रतों की संख्या कम से कम 18  होनी चाहिए। 

 

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सधन्यवाद सर जी    
ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव
“श्री मां चिंतपूर्णी ज्योतिष संस्थान
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 ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री
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ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है. कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं। आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं  में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं। जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋण और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा, विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

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