छत्तीसगढ़

स्वार्थपरक एवं अपराधिक पृष्ठभूमि के लोगो पर नही किया जाएगा विचार…सूत्र भाजपा

नही लड़ पाएंगे नवेले दावेदार

मनीष शर्मा:
मुंगेली: आगामी नगरीय निकाय चुनाव होने को है नगर पालिका अध्यक्ष के लिए आरक्षण भी निर्धारित हो चुका है। मुंगेली नगर पालिका में ताजा आरक्षण के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिजर्व हुआ है।

आरक्षण तय होने के बाद मुंगेली नगर पालिका में अध्यक्ष पद के भाजपा से कुछ ऐसे दावेदार सामने आ रहे है जो कि अपनी पुरानी पृष्ठभूमि को दबाने अथवा पैसों के दम पर नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी मीडिया के माध्यम से कर रहे है।

मगर ऐसे दावेदारों के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए बन रही नई गाइडलाइन के मुताबिक अब वो लोग किसी भी पड़ के लिए दावेदार नही हो सकेंगे जो हाल फिलहाल राजनैतिक स्वार्थसिद्धि के लिए भाजपा में प्रवेश लेकर लाबिंग कर रहे है साथ ही ऐसे लोग अथवा परिवार जिनका राजनीतिक रूप से जुड़ाव, सक्रियता शून्य रही हो वे भी भाजपा प्रवेश के दो वर्षो तक लगातार बिना किसी दावेदारी के संगठन के लिए काम करते रहना होगा।

ऐसे में मुंगेली नगर पालिका में कुछ सरकारी नौकरशाह जो स्वेक्षिक सेवानिवृत्त होकर दावेदार कर रहे अथवा अवैध कारोबारों में अपराधिक प्रवृत्ति के लोगो के मंसूबों पर भाजपा की नई गाइडलाइन के बाद पानी फिरता नजर आ रहा है।

नगर पालिका चुनाव के लिए राजनीतिक आवरण ओढ़ने का कुत्सित प्रयास

बता मुंगेली नगर पालिका में अचानक भयानक ऐसे दावेदार उभरे है जिनका प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं अथवा परिवारजनों के सैकड़ों जमीन अफरा तफरी, शासकीय भूमि को बलात कब्जा कर भवन बनाने, सरकारी जगहों को आम रास्ता बता अवैध प्लॉट बेचने, धोखाधड़ी जैसे बहुत से मामले राजस्व अथवा कोर्ट में लंबित है जिनके द्वारा भी नगर पालिका चुनाव के लिए राजनीतिक आवरण ओढ़ने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।

ऐसे में 15 वर्षो के सत्ता सुख के बाद बाहर हुई भाजपा के पास ऐसे दावेदारों की रिपोर्ट पहुचने लगी माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश चुनाव समिति ने बहुत गंभीरता से लेते हुए नई गाइडलाइन बनाने का निर्णय लिया गया।

हालांकि भाजपा का यह निर्णय संगठन के पास अनाधिकृत रूप से चर्चाओ में ही पहुंचा है मगर नई गाइडलाइन ने तो बहुत से सफेदपोशों के नापाक मंसूबो पर पानी फेर दिया एक तरफ तो राजनैतिक आवरण की लालच में शासकीय सेवा से वंचित होना पड़ा वहीं दूसरी ओर नई गाइडलाइंस के पारित होने के बाद ऐसे दावेदारों के ये संगठनात्मक रूप से झंडा उठाने और नारा लगाने का ही काम शेष रहने की जमकर चर्चा हो रही है।

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