गंगानगर सेक्टर-2 में मोबाइल टॉवर लगने से नाखुश जनता

जीडीए ने बिना जांच पड़ताल जारी कर दी अनुमति

भरत ठाकुर

बिलासपुर

शहर के गंगानगर सेक्टर-2 में 36 माल के पीछे रिहायशी ईलाके के मकान पर लगाया जा रहे मोबाइल टॉवर से आसपास के लोग नाखुश नजर आ रहे हैं। बता दें कि रेडिएशन की समस्या से जूझ रहे गंगा नगर में जनता ने इसका विरोध शुरू कर दिया। यहां के रहवासियों का कहना था कि जीडीए बिना जांच पड़ताल के घनी आबादी वाली एरिया में मोबाइल टॉवर लगाने की परमिशन दे दी है।
टॉवर लगाए जाने का विरोध करते हुए गंगानगर सेक्टर 2 निवासी प्रताप सिंह ठाकुर, निखिल तिवारी, दीपक सिंह ठाकुर, निर्मल साहू, राजेश्वर सिंह, दुर्गेश सिंह, रामनिवास ठाकुर, चिन्टु गुप्ता, दीपक मैत्री, सिमरन चतरथ, अमितेष सिंह ठाकुर, हनिफ खान का कहना है कि टॉवर की लोकेशन के आसपास कई स्कूल हैं, जिससे रेडिएशन का असर बच्चों पर पड़ने का खतरा है।

इलेक्टोमैग्नेटिक वेब्स हैं खतरनाक

शोद्य में ये बात सामने आई है कि मोबाइल टॉवर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेब्स कैंसर का कारण बनती है, इस रेडिएशन से जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टॉवरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है, ग्रामीण अंचल में इसी वजह से मधुमक्खियां समाप्त हो गई है।

किस एरिया में नुकसान सबसे ज्यादा

एक्सपर्ट्स की मानें तो मोबाइल टॉवर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटेना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। जाहिर है सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है। मोबाइल टॉवर से होने वाले नुकसान में यह बात भी अहमियत रखती है कि घर टॉवर पर लगे ऐंटेना के सामने हैं या पीछे। टॉवर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टॉवर पर जितने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।

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