सैकड़ो किलोमीटर की दूरी तय कर लोग घर पहुँचने को हुए मजबूर,पैरो में पड़ गए छाले

मजदूरों के पैरो में पड़ गए छाले, फिर भी पैदल चलने को मजबूर

अरविन्द

कटघोरा : जिस तरह covid-19 कोरोना वायरस ने देश मे तबाही का आलम बिखेरा है। इससे पूरा देश सिहर उठा है। सम्पूर्ण भारत आज लॉग डाउन की स्थिति में नजर आ रहा है।

पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। सैकड़ो लोग लॉग डाउन होने से जहाँ थे वही फस कर रह गए हैं। वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है चौक चौराहो पर पुलिस की सतर्कता नजर आ रही है।

बड़े बड़े कारखानों फैक्ट्रियों से लोगो को निकाला जा चुका है जिस कारण यहाँ काम कर रहे मजदूर पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर हो गये है।

 

सड़को पर कई मजदूर पैदल सफर करते नजर आ रहे 

कटघोरा की सड़को पर भी ऐसे ही कई लोग पैदल सफर करते नजर आ रहे हैं ये लोग कई दिनों से पैदल चलकर सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय करने को मजबूर हैं पैरो में छाले पड़ चुके हैं फिर भी इन्होंने हिम्मत नही हारी और घर जाने के जुनून में अपने सफर को लगातार बनाये हुए हैं।

जब clipper 28 की टीम ने इनसे चर्चा की तो इन्होंने बताया कि किस कदर फैक्ट्रियों के मालिकों ने इनकी मदद करने की बजाए इनको इन्ही के हाल पर छोड़ दिया।लगभग 15 की तादात में ये मजदूर रायपुर से अम्बिकापुर जाने के लिए 29 तारीख को निकले थे और पैदल सफर करते आज ये लोग कटघोरा तक पहुचे है। केवल भाड़ा के लिये महज कुछ रुपये देकर इनको फैक्ट्रियों से जाने को कह दिया।

गरीबी की मार झेल रहे ये लोग अपने परिवार के लिए कमाने की जद्दोजहद में शहर की ओर रुख कर लेते हैं और फैक्ट्रियों के मालिक इनका पूरा लाभ उठा कर अपने कार्यो अंजाम देते हैं।जब मुशिबत कि घड़ी आई तो बड़ी सहजता से इनके मालिको ने इनको दर दर भटकने पर मजबूर कर दिया।

रोजी मजदूरी कर शहर के हालातों से बेखर ये मजदूर अपने परिवार का भरण पोषण करने की चाह में कमाने आये थे पर इन्हें क्या पता था जिस जगह ये लोग काम कर रहे हैं गम्भीर हालातो में इनके मालिक किनारा कर लेंगे।

प्रसाशन से भी इनको कोई मदद नही मिल रही है ये लोग पैदल ही सैकड़ो किलोमीटर का सफर कर अपने घर जाने को मजबूर हो गए हैं। अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे ये मजदूर आखिर अपनी समस्या किसे बताये।अब तो इन्हें भी लगने लगा है कि मदद तो मिलने से रही अब तो जैसे तैसे कर पैदल ही इस सफर को पूरा कर घर पहुचना है।

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