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विकास यात्रा के खिलाफ याचिका : हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं

विकास यात्रा के खिलाफ याचिका : हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं

कृष्णा केशरवानी

बिलासपुर। विकास यात्रा के राजनीतिक दुरूपयोग के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर बुधवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अवकाश पीठ में सुनवाई हुई। न्यायालय ने याचिका को अवकाश बाद उचित खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए फिल्हाल कोई अंतरिम राहत देने से इंकार किया।

रायपुर निवासी डॉ. अजीत आनंद देग्वेकर ने उक्त जनहित याचिका दायर की है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का सरकारी विज्ञापन संबंधी दिशा-निर्देश निराकरण यात्रा कार्यक्रम को भी कवर करता है क्योंकि यह सरकार के द्वारा अपनी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए किए जाने वाला कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का पूरा खर्च जनता के पैसे से किया जा रहा है। अत: इसमें किसी एक राजनैतिक दल को प्रमुखता नहीं दी जा सकती।

याचिका में 12 मई से 18 मई के बीच के विकास यात्रा कार्यक्रमों के फोटोग्रॉफ्स और समाचार पत्र की कटिंग प्रस्तुत की गई है जिससे यह साबित होता है कि विकास यात्रा कार्यक्रम पर पूरी तरह भाजपा ने कब्जा कर रखा है।

आज जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अवकाश पीठ के समय इस मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, हिमांशु शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कैसे एक राजनैतिक दल का महिमा मंडन सरकारी खर्च या जनता के पैसों पर किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हम विकास यात्रा के खिलाफ नहीं है पर जिस तरह शासन प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम को भाजपा का कार्यक्रम बना दिया है उस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

उदाहरण देते हुए अधिवक्ताओं ने बताया कि दंतेवाड़ा के उद्घाटन कार्यक्रम में मंच पर धरमलाल कौशिक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे जबकि, कौशिक सांसद हैं न नेता विधायक और न ही किसी सरकारी पद पर हैं। इसके विपरीत स्थानीय विधायक मंच पर नहीं बुलाए गए। विज्ञापनों में विकास यात्रा के लोगो (सिम्बॉल) के साथ भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल (सिम्बॉल) का खुले आम उपयोग किया जा रहा है। पूरे कार्यक्रम में भाजपा के झंडे लगे हुए है, यहाँ तक की मुख्यमंत्री स्वयं राजनैतिक भाषण दे रहे जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।

उच्च न्यायालय को अवकाश पीठ ने मामले को अवकाश समाप्त होने के बाद उचित खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और कहा कि हमारी सुनवाई अतिशीघ्र राहत देने तक ही सीमित है। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने तर्क देते हुए कहा कि यात्रा के प्रथम चरण में 11 जून तक 62 विधानसभा के कार्यक्रम पूरा हो जाएगा।

अत: तुरंत निर्देश दिया जाना जरूरी है। यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का शत-प्रतिशत पालन होगा। छत्तीसगढ़ शासन की तरफ से महाअधिवक्ता जेके गिल्डा ने याचिका पर अपना विरोध दर्ज कराया। उभय पक्षों के तर्क सुनने के बाद अवकाश खंडपीठ ने फिलहाल कोई अतिरिक्त राहत देने से इंकार कर दिया। अब मामले की सुनवाई अवकाश पश्चात खंडपीठ में होगी।

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