अंतर्राष्ट्रीय

कोविड-19 के खिलाफ टीका बना रही दवा कंपनियां और लैब्स हैकर्स के निशाने पर

यूरोपीय मेडिकल एजेंसी पर हाल में साईबर हमले हुए

नई दिल्ली: यूरोपीय मेडिकल एजेंसी पर हाल में साईबर हमले हुए. दवा कम्पनी फाइजर और बायो-एन-टेक के वैक्सीन से जुड़े दस्तावेज चुराने की कोशिश की गई. फाइजर ने एक बयान जारी कर कहा कि EMA को नियामक मंजूरी के लिए सौंपे गए दस्तावेज गलत तरीके से हासिल करने की कोशिश की गई. हालांकि कम्पनी ने साफ किया कि इस घटना के दौरान उसके किसी सिस्टम में सेंध नहीं लगी और और ना ही कोई व्यक्तिगत डेटा चुराया गया.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं पर 80 लाख से ज्यादा साईबर हमले हुए है वैसे यह कोई पहला मामला नहीं है. साबरपीस फॉउंडेशन जैसे संगठन अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा करते है कि बीते तीन महीनों के दौरान भारत में ही स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं व कम्पनियों पर 80 लाख से ज्यादा साईबर हमलों की घटनाएं मापी गईं. अधिकतर हमलों में रैन्समवेयर या साईबर फिरौती वसूली के हथकंडों का इस्तेमाल किया गया. इन वारदातों के दौरान नेट वॉकर, पोनीफाइनल और मेज का बहुतायत में प्रयोग किया गया. यह सभी बेहद खतरनाक कंप्यूटर वायरस हैं.

गत माह माइक्रोसॉफ्ट ने भी साईबर हमलों पर जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि मुख्यतः अमेरिका, कनाडा, दक्षिण कोरिया, भारत की उन कम्पनियों को शिकार बनाने की कोशिश हो रही है जो कोरोना के खिलाफ टीका विकसित करने में लगी है. माइक्रोसॉफ्ट ने नाम तो नहीं लिया मगर जाहिर है जिन कम्पनियों की तरफ इशारा किया गया उनमें भारत-बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट जैसी देसी कम्पनियां भी शामिल हैं.

वैक्सीन सीक्रेट चुराने के लिए हो रही हैकिंग के इस काले कारोबार में कुछ देशों की तरफ भी बीते कुछ दिनों में उंगलियां उठी हैं. कुछ दिन पहले समाचार एजेंसी रॉयटर ने ओक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रोजेनका कम्पनी को निशाना बनाते हुए की गई कोशिशों को रिपोर्ट किया था. रॉयटर्स के मुताबिक संदिग्ध उत्तर कोरियाई हैकर्स ने एस्टरोजेनका के कर्मचारियों को मालवेयर के साथ जॉब ऑफर वाले ईमेल भेजे थे. जाहिर है इसके जरिए कम्पनी के कम्प्यूटर सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश थी.

साईबर सुरक्षा विशेषज्ञ हैकर्स के निशाने पर निजी कम्पनियां है तो सरकार भी है जिसके पास इस महामारी के वक्त में बहुत से अहम फैसलों का स्रोत है. कुछ हफ्तों पहले भारत के कम्प्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम यानी सर्ट ने आगाह किया कि सरकारी ईमेल धारकों के पास जानकारियां चुराने के लिए फर्जी मेल भेजे गए जिसमें गलत पहचान के साथ लॉगिन की कोशिश पर अलर्ट किया गया. साथ ही सम्बंधित कर्मचारियों को अपनी सही जानकारियों के साथ ईमेल में दिए लिंक पर लॉगिन करने को कहा गया. स्वाभाविक है कि नेशनल इंफोर्मेटिक सेंटर की पहचान के साथ भेजे गए इस फर्जी ईमेल को सही मानकर वास्तविक जानकारियां फिसिंग वेबसाइट पर दे सकते थे. ऐसा करने पर सम्बंधित कर्मचारी ही नहीं सरकार की महत्वपूर्ण जानकारियां जाने का खतरा है. A

साईबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि कोविड19 महामारी को हैकर्स और डेटा चोरों ने भी खूब अवसर की तरह इस्तेमाल किया. ऐसे में जबकि अधिकतर लोग अब भी अपने घरों से काम कर रहे हैं और डिजिटल कार्य व्यवहार को तरजीह दीप जा रही है, तब हैकर्स इसका इस्तेमाल बैंक डिटेल्स जैसी जानकारियां चुराने में कर रहे हैं. इतना ही नहीं डार्कवेब पर भी धड़ल्ले से कोविड-19 के इलाज के नाम पर ठगी की जा रही है. इसमें महंगे दामों पर प्लाज़्मा की बिक्री भी शामिल है.

साईबर गिरोहों की नजर वैक्सीन सीक्रेट चुराने पर है- साईबर सुरक्षा विशेषज्ञ ऐसे में हेल्थकेयर कम्पनियों, दवा फैक्ट्रियों, वैक्सीन लैब्स और लॉजिस्टिक्स कम्पनियों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है. कोविड-19 के दौरान स्वाभाविक तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र की कम्पनियों और अस्पतालों में पैसों का खूब लेनदेन हुआ.

वहीं सबकी नजर वैक्सीन निर्माण पर भी बनी हुई है. ऐसे में कई सरकारों से लेकर साईबर गिरोहों की नजर वैक्सीन सीक्रेट चुराने पर है. अमित बताते हैं कि इन दिनों लॉजिस्टिक्स कम्पनियों से जानकारियां चुराने पर भी काफी दिलचस्पी इन दिनों नज़र आ रही है. क्योंकि कोविड-19 के टीके का वितरण कैसे होगा इसमें लॉजिस्टिक कम्पनियों की बड़ी भूमिका है. गौरतलब है कि हाल में इंटरपोल ने भी दुनिया के सभी देशों को कोविड-19 रोधी वैक्सीन चुराने के लिए चल रही हैकिंग और उसकी कालाबाज़ारी की तैयारी में लगे गिरोहों पर आगाह किया है. इंटरपोल ने ऑरेंज नोटिस जारी कर सभी देशों से कोविड-19 टीके पर विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी है.

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