ज्योतिष

पितृ दोष निवारण उपाय

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री “श्री मां चिंतपूर्णी ज्योतिष संस्थान 5, महारानी बाग, नई दिल्ली -110014 8178677715

पितृ दोष निवारण उपाय

  1. जातक को उचित समय आने पर अपने पुरुष पूर्वजों/पितरों को आदरपूर्वक याद करना चाहिए। श्राद्ध मास आने पर उनका श्राद्ध करना चाहिए। प्रतिवर्ष आने वाला आश्विन मास का कृष्ण पक्ष श्राद्ध का पक्ष होता है। उनकी तिथि याद न रहने पर श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए। ऐसा करने से जातक के पूर्वज/ पितृ संतुष्ट होकर उसे आशीर्वाद देते हैं।
    1. उनकी भटकती आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है और जातक का यह दोष भी शांत हो जाता है। स्मरण रहे कि सूर्य की राहु/केतु/शनि के साथ जिस भाव में युति होती है, उसी भाव से संबंधित पितृ दोष होता है।

    2. यदि किसी जातक की जन्मकुंडली सूर्य-राहु, सूर्य-शनि आदि योगों के कारण पितृ दोष हो, तो उसके लिए नारायण बलि, नाग पूजा, अपने दिवंगत पितरों का श्राद्ध, पितृ तर्पण, ब्रह्म भोज, दानादि कर्म करवाने चाहिए।

    3. पितृ दोष निवारण के लिए अपने घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने दिवंगत पूर्वजों के फोटो लगाकर, उनपर हार चढ़ाकर सम्मानित करना चाहिए तथा उनकी मृत्यु तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र एवं दक्षिणा सहित दान, पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म करने चाहिए।

    4. जीवित माता-पिता एवं भाई-बहनों का भी आदर-सत्कार करना चाहिए।

    5. हर अमावस्या को अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल पर कच्ची लस्सी, गंगाजल, थोड़े काले तिल, चीनी, चावल, जल, पुष्पादि चढ़ाते हुए ऊँ पितृभ्यः नमः मंत्र का जाप करें।

    6. पितृ सूक्त का पाठ करना शुभ होगा।

    7. हर संक्रांति, अमावस्या एवं रविवार को सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल चंदन गंगाजल, शुद्ध जल डालकर बीज मंत्र पढ़ते हुए तीन बार अघ्र्य दें।

9.. श्राद्ध के अतिरिक्त इन दिनों में गायों को चारा खिलाएं।

  1. कौए, कुत्तों को दाना एवं असहाय एवं भूखे लोगों को भोजन कराना चाहिए। पितृ दोष के अन्य उपाय श्राद्ध पक्ष में मृत्यु तिथि के दिन तर्पण व पिंडदान करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं व वस्त्र/दक्षिणा आदि दें। यदि मृत्युतिथि न मालूम हो तो श्राद्ध पक्ष की अमावस्या के दिन तर्पण व पिंडदानादि कर्म करें। प्रत्येक अमावस्या विशेषतः सोमवती अमावस्या को पितृभोग दें। इस दिन गोबर के कंडे जलाकर उसपर खीर की आहुति दें। जल के छींटे देकर हाथ जोड़ें व पितृ को नमस्कार करें। सूर्योदय के समय सूर्य को जल दें व गायत्री मंत्र का जप करें। पीपल के पेड़ पर जल, पुष्प, दूध, गंगाजल व काले तिल चढ़ाकर पितृ को याद करें, माफी और आशीष मांगें। रविवार के दिन गाय को गुड़ या गेहूं खिलाएं। लाल किताब के अनुसार परिवार में जहां तक खून का रिश्ता है जैसे दादा, दादी, माता, पिता, चाचा, ताया, बहन, बेटी, बुआ, भाई सबसे बराबर-बराबर धन, 1, 5 या दस रुपए लेकर मंदिर में दान करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। हरिवंश पुराण का श्रवण और गायत्री जप पितृ शांति के लिए लोकप्रसिद्ध है। गया या त्रयंबकेश्वर में त्रिपिंडी श्राद्ध नन्दी श्राद्ध करें। नारायणबलि पूजा करवाएं। पितृ दोष निवारण उपायों में गया में पिंडदान, गया श्राद्ध तथा पितृ भोग अर्पण आदि क्रियाएं करते हुए निम्नांकित पितृ गायत्री का उच्चारण करना चाहिए। पितृ कर्म हेतु साल में 12 मृत्यु तिथि, 12 अमावस्या, 12 पूर्णिमा, 12 संक्रांति, 12 वैधृति योग, 24 एकादशी व श्राद्ध के 15 दिन मिलाकर कुल 99 दिन होते हैं। पितृ गायत्री का अनुष्ठान करवाएं।

पितृ दोष निवारण यंत्र

ऊँ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः। ऊँ प्रथम पितृ नारायणाय नमः।। सिद्ध पितृ दोष यंत्र को किसी योग्य पंड़ित से, पूर्ण विधि-विधान से पूजा घर में स्थापित करा लें। फिर हर दिन इसे पितृ देवता तुल्य मानते हुए इसकी पूजा-अर्चना और उपरोक्त मंत्रों का कम से कम 11 बार जाप करके सुख-शांति की विनती करें। इस यंत्र को पितरों के समान सम्मान दें और नित्य दर्शन पूजन करें। यंत्र के पूजन से पितृ दोष कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त पितृ दोष निवारण के लिए पितृ दोष निवारण यंत्र के सम्मुख नित्य पुराणोक्त पितृ-स्तोत्र, पितृ कवच, पितृ सूक्त, कालभैरवाष्टकम् और श्री पितृ देव जी की आरती करनी चाहिए यह पितृ दोष से मुक्ति का अचूक उपाय है। विशेषकर अमावस्या के दिन इस यंत्र का पूजन अर्चन अवश्य करें।. पितृ दोष निवारण यंत्र के नित्य दर्शन और दिए गए मंत्र का नित्य 108 बार जाप करने से पितृ दोष में कमी होती है, पितृ संतुष्ट होते हैं जिसके फलस्वरूप जीवन में बाधाएं नहीं आती हैं और जातक को सभी कार्यों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त होती है।

पितृ दोष निवारण मंत्र

ऊँ पितृभ्यः नमः प्रत्येक अमावस्या के दिन अपने पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजन, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें और ‘ऊँ पितृभ्यः नमः’ पारद माला पर 108 बार जाप करें। ऊँ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः। ऊँ प्रथम पितृ नारायणाय नमः। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

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