जन्म कुंडली में पितृ दोष…

जन्म कुंडली में पितृ दोष:-

जन्म कुंडली में दूसरे चौथे पांचवें सातवें नौवें दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति स्थित हो तो यह पितृदोष माना जाता है।

सूर्य यदि तुला राशि में स्थित होकर राहु या शनि के साथ युति करें तो अशुभ प्रभावों में और ज्यादा वृद्धि होती है।

इन ग्रहों की युति जिस भाव में होगी उस भाव से संबंधित व्यक्ति को कष्ट और परेशानी अधिक होगी तथा हमेशा परेशानी बनी ही रहेगी।

लग्नेश यदि छठे आठवें बारहवें भाव में हो और लग्न में राहु हो तो भी पितृदोष बनता है।

पितृ दोष के कारण क्या नुकसान देखने को मिलते हैं?

व्यक्ति को मानसिक परेशानी हमेशा लगी रहती है तथा पारिवारिक संतुलन नहीं बैठ पाता है।

जीवन में बहुत ज्यादा पैसा कमाने के बाद भी घर में बरकत नहीं हो पाती है।

स्वयं निर्णय लेने में बहुत परेशानी होती है तथा लोगों की सलाह अधिक लेनी पड़ती है।

परीक्षाओं तथा साक्षात्कार में भी  असफलता मिलती है।

यदि आप सरकारी या प्राइवेट नौकरी में है तो अपने उच्च अधिकारियों कि नाराजगी झेलनी पड़ती है।

सुबह के समय उठने के बाद परिवार में अचानक कलह क्लेश होता है।

विवाह की बात अक्सर बनते बनते बिगड़ जाती है।

आपको बार-बार यदि आपको चोट लगती है और दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं।

घर मे मांगलिक कामों में विघ्न आता ही रहता है।

अक्सर घर की दीवारों में दरारें भी आती है।

परिवार में या घर मे मेहमान आना बंद हो जाते है।

दाम्पत्य जीवन के क्लेश के कारण जीवन के मुश्किलें आ जाती है।

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