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कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए बूथ बनाने का प्लान, टीमों का होगा गठन

सरकारी और निजी डॉक्टरों को दी जाएगी इस अभियान की विशेष जिम्मेदारी

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में जिस तरह से चुनाव के दौरान पोलिंग बूथ बनते हैं उसी तरह से कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए बूथ बनाने का प्लान है. पोलिंग बूथ की तरह टीमों का गठन होगा.

ब्लॉक लेवल पर रणनीति तैयार की जाएगी. सरकारी और निजी डॉक्टरों को इस अभियान की विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी. साथ ही जनभागीदारी के लिए प्रयास के साथ-साथ उन्हें जरूरी प्रशिक्षण दिया जाएगा.

टीकाकरण को लेकर अलग-अलग तबकों में तरह-तरह की भ्रांतियां रहती हैं. इसलिए सरकार पहले से ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस दिशा में जागरुकता अभियान चलाने के लिए कह चुकी है. इसके अलावा वैक्सीन के किसी दुष्प्रभाव से निपटने के लिए भी राज्यों को तैयार रहने को कहा गया है. किसी एलर्जिक रिएक्शन की स्थिति से निपटने के लिए राज्यों को मेडिकल सिस्टम दुरस्त रखने के लिए कहा गया है.

कैसे स्टोर होती है वैक्सीन?

वैक्सीन को जिस डीप फ्रीजर में रखते हैं उसे आइस लाइन्ड रेफ्रीजरेटर कहते हैं. हर 30 मिनट पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इसके तापमान को जांचती है. भारत में राज्यों के पास वैक्सीन स्टोर करने के लिए करीब 2300 आइस लाइन्ड रेफ्रीजरेटर पहले से मौजूद हैं.

पहले किसे लगेगी वैक्सीन?

मोदी सरकार के मिशन वैक्सीन के अनुसार शुरुआत में 30 करोड़ वैक्सीन भारत में लगाने का प्लान है. प्राथमिकता के आधार पर हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और सीनियर सिटिजंस को वैक्सीन देने की तैयारी है. पहले चरण में वैक्सीन जिन्हें लगेगी उन्हें SMS के जरिए टीकाकरण की तारीख, समय और जगह बताई जाएगी. मैसेज में टीका देने वाले संस्थान और हेल्थर वर्कर का नाम भी होगा

वैक्सीन के कितने डोज जरूरी?

अभी तक जितनी भी वैक्सीन फाइनल स्टेज में पहुंची हैं, सभी के दो डोज लगाए गए हैं. इसलिए माना जा रहा है कि कोरोना वैक्सीन के लिए दो डोज जरूरी हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय भी जिस तरह से वैक्सीन की तैयारी कर रहा है, उससे भी ये अंदाजा लगाया जा रहा कि वैक्सीन की दो डोज जरूरी होंगे.

टीकाकरण की मॉनिटरिंग कैसे?

सही समय पर दोनों डोज लगाने के लिए मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क तैयार किया है. ये 2015 में शुरू किए गए इलेक्ट्रानिक वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क का बदला हुआ स्वरूप है.

करोड़ों बच्चों तक बिना किसी रुकावट के वैक्सीन पहुंचाने में ये सिस्टम बहुत कारगर साबित हुआ है. इसके जरिए पहली डोज दिए जाने के बाद, दूसरी डोज के लिए SMS भेजा जाएगा. जब टीकाकरण पूरा हो जाएगा तो डिजिटल QR आधारित एक सर्टिफिकेट भी जेनरेट होगा. ये सर्टिफिकेट वैक्सीन लगने का सबूत होगा.

सभी लोगों को कब मिलेगी वैक्सीन?

आम आदमी तक वैक्सीन पहुंचने में अभी करीब-करीब पांच से छह महीने का वक्त लग जाएगा. क्योंकि अभी तक जितनी भी वैक्सीन तीसरे चरण के ट्रायल में सफल हुईं हैं उन सभी का मास प्रोडक्शन अगले साल ही शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि मोदी सरकार ने अभी से राज्यों को वैक्सीन के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन स्थापित करने के लिए कहा है.

क्या वैक्सीन लगने के बाद कोरोना नहीं होगा?

महामारी के दौर में कोरोना वैक्सीन को संजीवनी कहा जा रहा है, लेकिन क्या संजीवनी आने के बाद पूरी दुनिया को कोरोना से मुक्ति मिल जाएगी. क्या मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की बाध्यता खत्म हो जाएगी.

क्या वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा?

ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब जानना जरूरी है. वैक्सीन लगने से वातवरण में मौजूद वायरस खत्म नहीं होंगे. वैक्सीन सिर्फ वायरस से आपका बचाव करेगी और अभी तक किसी भी वैक्सीन ने वायरस से सौ फीसदी बचाव का दावा नहीं किया है. ना ही ये बताया है कि वैक्सीन का असर कब तक रहेगा. ऐसे में वैक्सीन के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सभी के लिए जरूरी होगा.

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