ज्योतिष

ग्रहों का प्रभाव और शांति

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सूर्य ग्रह शांति

।। ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रूं स: सूर्याय स्वाहा:।। 

प्रतिदिन सूर्येदेव को प्रणाम करके ताम्र पात्र में जल सामने रखकर लाल वस्त्र धारण करके पूर्व दिशा की तरफ मुख करके 1 माला सूर्यमंत्र जाप करने के पश्चात ताम्र पात्र का जल स्वयं पी लें। 

पिता की सेवा करने से भी सूर्येदोष शान्त होता है
पश्चात ताम्र पात्र का जल स्वयं पी लें।

चन्द्र ग्रह शांति

।। ऊँ श्रां श्रीं स: सोमाय नम: स्वाहा:।। 

सफेद वस्त्र धारण करके ताम्र मात्र में ही जल भरकर वायव्य कोण अर्थात पूर्व दक्षिण की तरफ मुख करके एक माला चन्द्र मंत्र से जाप करके जाप समापित के पश्चात ताम्र पात्र का जल पी लें।

मंगल ग्रह शांति

 
।। ऊँ क्रां क्रीं क्रूं स: भौमाय नम: स्वाहा:।। 

लाल वस्त्र धारण करके ताम्र पात्र में जल भरकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके तीन माला मंगल मंत्र का जाप करके ताम्र पात्र का जल स्वयं पी लें।

बुध ग्रह शांति

 
।। ऊँ ब्रां, ब्रीं, ब्रूं स: बुधाय नम: स्वाहा:।। 

बुधवार के दिन कुशासन बिछाकर उस पर हरे रंग का वस्त्र रखकर उत्तर दिशा की तरफ मुख करके पांच माला बुध मंत्र से जाप करें, फिर सायंकाल तीन बच्चों को मूंग की दाल से बना हलुआ और पकौड़ी खिलायें।

गुरू ग्रह शांति

 
।। ऊँ ज्ञां ज्ञीं ज्ञूं स: गुरूवे नम: स्वाहा:।। 

शुक्ल पक्ष के गुरूवार को पीतल के बर्तन में जल भरकर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके 9 माला गुरू मंत्र से जाप करें तत्पश्चात पीतल के बर्तन में रखा जल पी लें। मंदिर में पुजारी को बेसिन के लडडू प्रसाद के रूप में दें

शुक्र ग्रह शांति

।। ऊँ आं र्इं ऊँ स: शुक्राय नम: स्वाहा:।। 

शुक्रवार के दिन पशिचम दिशा की तरफ मुख करके 2-7 माला शुक्र मंत्र से जाप करें जाप के उपरान्त 10 वर्ष से कम आयु वाली कन्या को देसी घी से निर्मित हलुआ (सूजी का) खिलाना चाहिये एवं सफेद गाय को भोजन करायें।

शनि ग्रह शांति

।। ऊँ षां षीं षूं स: शनि देवाय नम: स्वाहा:।। 

शनिवार को सूर्यास्त के पश्चात स्टील की कटोरी में जल रखकर किसी भी दिशा में 7 माला शनि मंत्र का जाप कर लें उसके पश्चात जल स्वयं पी लें। साढ़े साती चलते रहने पर कांसे की कटोरी में कड़वा तेल डालकर अपना प्रतिबिम्ब देखकर शनि मनिदर में शनि प्रतिमा पर चढ़ा दें।

राहू ग्रह शांति

।। ऊँ भ्रां भ्रीं भू्रं स: राहुवे नम: स्वाहा:।। 

कृष्ण पक्ष के बुधवार को राहु मंत्र का 7 माला जाप करने के पश्चात नारियल का दान कर दें एवं पत्तों समेत मूली भी दान कर दें।

केतू ग्रह शांति

 
।। ऊँ क्लीं क्लीं क्लूं स: केतवे नम: स्वाहा:।। 

केतु मंत्र का जाप मंगलवार को आरम्भ करना चाहिए कुशा आ आसन उसके ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर लाल वस्त्र भी धारण करके दक्षिण दिशा के तरफ मुख करके तांबे के कटोरी में जल भरकर जाप आरम्भ करें तत्पश्चात जाप समाप्त होने पर जल का पान कर लें। गणपति की आराधना करने पर भी केतु का प्रभाव क्षीण हेता है

मंगल के दिन किसी गरीब मजदूर को पकौड़ी खिलाने से केतू ग्रह शान्त होता है।

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