छत्तीसगढ़

किसानों की आमदनी बढ़ाने स्टाप डेम बनावानें योजना तैयार

सब्जी एवं फलों की खेती व्यवसायिक रूप से करने की कार्य-योजना तैयार करें

अम्बिकापुर : सरगुजा संभाग के संभागायुक्त अविनाश चम्पावत ने कहा है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए स्टाप डेम और बांध के आस-पास की जमीन वाले किसानों का चिन्हांकन कर लेवें और उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा रेशम विभाग की योजनाओं को सुनियोजित और समन्वित ढंग से संचालित करने के लिए कार्य योजना तैयार कर एक सप्ताह के अन्दर उपायुक्त विकास के पास जमा करें, जिससे इन कार्य योजनाओं को डीएमएफ मद से स्वीकृति के लिए कलेक्टरों के पास भेजा जा सके।

कमिश्नर चम्पावत ने यह निर्देश आज यहां कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में सम्पन्न संभाग के सभी जिलों के उद्यान, पषुपालन, मत्स्य पालन और रेषम विभाग के अधिकारियों को दिए।
संभागायुक्त चम्पावत ने उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य एवं रेशम विभाग के अधिकारियोे से कहा है कि वे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर यह तय करें कि किन-किन स्टाप डेम एवं बांधों के पास की जमीन वाले किसानों को चिन्हांकित किया जाना है।

उन्होंने कहा कि किसानों का चिन्हांकन करने के बाद किसानों के नाम, उनके पास उपलब्ध कुल भूमि, वर्तमान में वहां ली जा रही फसल का नाम तथा भविष्य में वहां खेती की जाने वाली फसल का नाम संबंधी जानकारी संकलित करें, ताकि डाटाबेस तैयार हो सके। संभागायुक्त ने कहा कि किसानों को संगठित करें और जिले की आवश्यकता के अनुसार सब्जी, फल, दूध, अण्डा, मटन तथा रेशम के कपड़े का उत्पादन करने के लिए कार्य योजना तैयार करें।

उन्होंने उद्यान विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे चार-पांच तरह की सब्जी एवं फलों की खेती व्यवसायिक रूप से करने की कार्य-योजना तैयार करें। पशुपालन विभाग के अधिकारियों से कहा गया है कि जिले की आवश्यकतानुसार दूध, अण्डा, मटन की पूर्ति के लिए पशुपालन करने की योजना तैयार करें तथा पशुपालन योजना को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए हरा चारा उत्पादित करने की योजना भी तैयार करें। हरा चारा उत्पादन करने वाले किसान को यह पता रहे कि उसके क्षेत्र के कितने किसानों ने पशुपालन किया है और वे कितने हरे चारेे की खरीदी कर सकते हैं। मुर्गीपालन और बकरी पालन की योजना भी तैयार करने के निर्देष दिए गए हैं।

संभागायुक्त चम्पावत ने अधिकारियों से कहा है कि वे केवल कार्य योजना बनाने तक ही सीमित नहीं रहें, बल्कि कार्य योजना बनाकर उसे परिणाम तक पहंुचाने में अपनी महती भूमि का निर्वहन करें। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे जिले की आवश्यकता के अनुसार चिन्हांकित क्षेत्र में मत्स्य पालन करने की योजना तैयार करें और यदि आवश्यकता हो तो विभागीय योजना तथा नरेगा से किसानों के लिए डबरी खुदवाने की योजना तैयार करें, ताकि वहां मत्स्य पालन किया जा सके।

उन्होंने रेशम विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे चिन्हांकित क्षेत्र में अर्जुन और साजा का वृक्षारोपण कराकर कर रेशम पालन की कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि स्टाप डेम बांध और जहां भू-जल स्तर अच्छा हो उन क्षेत्रों के किसानों का चिन्हांकन कर तथा वहां सिंचाई हेतु विद्युत की व्यवस्था करने के प्रस्ताव भी तैयार करें। संभागायुक्त ने कहा कि स्टाप डेम और बांध के आस-पास जमीन वाले किसानों का चिन्हांकन कर उनकी एफआईजी बनाए और प्रत्येक जिले में कम से कम 300 से 350 एफआईजी गठित कराएं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकासखण्ड में कम से कम एक एफपीओ का गठन किया जाए जिसमें कम से कम एक हजार किसान रहें। चम्पावत ने कहा कि एफपीओ में किसानों के साथ ही कुछ व्यवसायियो और पढ़े-लिखे स्थानीय युवकों को शामिल किया जाए, ताकि वे मार्केटिंग की व्यवस्था कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईजी एवं एफपीओ का गठन कंपनी एक्ट के तहत किया जाए।
बैठक में उपायुक्त विकास ए.पी. शांडिल्य और सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, जशपुर एवं बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा रेशम विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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