छत्तीसगढ़

सारंगढ़ में कागजों में हो गया 570 हेक्टेयर में प्लांटेशन, जांच के नाम पर मामले को दबाने में लगा वन विभाग

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हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़
रायगढ़  :
पूर्व डीएफओ के खेल में वर्तमान डीएफओ भी दे रहे साथसारंगढ़ वन परिक्षेत्र में वर्ष 2018 में हुए कथित 570 हेक्टेयर में प्लांटेशन का जिन्न फिर खुल गया है। कैंपा मद के तहत सारंगढ के 9 जगहों पर 3 लाख 95 हजार पौधे, 35 टन बारबेट वायर देखने से भी नहीं दिख रहे हैं। मामले पर जितना हंगामा हुआ उतनी जांच भी हुई लेकिन हर जांच शुरू होने से पहले दम तोड़ देती है। इस बार फिर जांच के लिए टीम आई पूर्व मंत्री जंगल अमले के बड़े अधिकारी आए। रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक ने जो विधानसभा में सवाल किया था।

दरअसल, तत्कालीन डीएफओ विजया रात्रे ने सारंगढ़ वन परिक्षेत्र के 9 कंपार्टमेंट के लिए ऐसी जगह का चुनाव किया था जो कठोर मिट्टी वाला क्षेत्र था। बताया जा रहा है कि मिट्टी खोदाई और जमीन को पौधा रोपने लायक बनाने में लाखों रुपये की बंदरबाट की गई। बारिश के बाद भी कठोर मिट्टी की खोदाई के नाम पर लाखों का बिल लगाकर शासन को चूना लगाया गया है। वहीं 3 लाख 95 हजार पौधों का रोपण भी केवल कागजों में किया गया है।

10, 28 और 65 रुपये की दर से करीब एक करोड़ रूपये से अधिक के पौधे खरीदे गए। जबकि खरीदी किए गए सैकड़ों पौधों को केडार डेम और आसपास के इलाके में फेंक दिया गया था। एक साथ 125 एकड़ जमीन दिखाना और उस जगह पौधारोपण करना, वनभूमि के बाहर पौधारोपण करना आदि शामिल हैं। उस समय सीसीएफ के पास शिकायत की गई जांच हुई लेकिन विभागीय सांठगाठ में जांच दब गई।

फिलहाल दो टीमें कर रही हैं जांच

विधानसभा में सारंगढ़ में हुए कथित प्लांटेशन को लेकर सवाल उठे जांच की मांग की गई तो जनप्रतिधियों (4 विधायक) की एक टीम और अधिकारियों (दो डीफओ,दो सीसीएफ, एक पीसीएफ) की दूसरी टीम बनाई गई। हाल ही में मंदिर हसौद के विधायक और पूर्व वनमंत्री सत्नारायण शर्मा की अगुवाई में एक जांच टीम प्लांटेशन देखने पहुंची और सिर्फ तीन एकड़ में ही 570 हेक्टेयर के प्लांटेशन का जायजा लेने की इतिश्री हो गई।

वन विभाग के रिटायर्ड एसडीओ पीएस पटेल का आरोप है कि पूर्व और वर्तमान डीएफओ इस पूरे मामले को दबा रहे हैं। कोई जनप्रतिनिधि इस मामले की जांच इसलिए नहीं कर सकता कि इसमें बहुत बारिकियां हैं। जैसे कोई भी किसी भी प्रयोजन के लिए वनभूमि की जोताई नहीं कर सकता यह धारा 26 ज का उल्लंघन है। इसी तरह ठोस मिट्टी कहकर विभाग को लूटा गया है।

वर्तमान डीएफओ पर उठ रहे सवाल

वर्तमान डीएफओ मनोज पाण्डेय की इस प्लांटेशन मामले काफी किरकिरी हो रही जिन्होंने शुरुआत में इस जांच को टेबल-टेबल खेल दिया। उन पर आरोप हैं कि वो कंबल ओढ़कर घी पी रहे हैं। बड़ी ही आसानी से वो इस पूरे मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उच्च स्तर पर जांच जारी है वो फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं। उनके ऊपर लगे आरोपों पर भी कहा कि इसकी जांच जारी है उनका कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।

डॉ. खुर्शीद पर कसा शिकंजा, कलेक्टर ने दिखाए तल्ख तेवर

पूर्व डीएफओ का पूरा कार्यकाल संदेह के दायरे में इस कथित प्लांटेशन के दौरान डीएफओ रहीं विजया रात्रे का पूरा रायगढ़ का कार्यकाल संदेह के दायरे में है। कई मामलों में जांच जारी है जबकि कई को समय के साथ विभाग ने दबा दिया। इनके साथ तत्कालीन एसडीओ एनआर खूंटे ने भी मैडम का भरपूर साथ दिया। इनके कार्यकाल में हुए लाठी, ग्लब्स, हेलमेट खरीदी की पूरे सूबे में चर्चा थी साथ ही उस फर्म की जो वास्तव में था ही नहीं। प्लांटेशन घोटाला उनके कार्यकाल का बड़ा घोटाला है। आरोप है कि इस पूरे मामले में ढाई से तीन करोड़ का चूना वन विभाग को लगाया गया। इन सब के बाद भी आज तक रायगढ़ की पूर्व डीएफओ को उच्च स्तर से वरदहस्त मिला हुआ है।

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