दिवाली पर ताश खेलना बहुत ही शुभ, जाने क्या है इसका महत्व

दिवाली की रात ताश खेलना आम बात है। कुछ लोग इस खेल को शौकिया तौर पर भी खेलते हैं तो कुछ आदतन जुआरी होते हैं। जुआरियों को दिवाली का खास इंतजार रहता है, लेकिन क्या आपको पता है कि दिवाली की रात ताश क्यों खेला जाता है.

धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा

क्योंकि दिवाली पर ताश खेलना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पटाखे फोड़ने के अलावा, ताश खेलना दिवाली पर मनोरंजन का सबसे अच्छा साधन है। इस दिन दोस्त और रिश्तेदार लक्ष्मी पूजा के बाद तीन पत्ती खेलते हैं।

दिवाली पर जुआ खेलने की परंपरा के पीछे भी एक पौराणिक कथा

ये पूजा के बाद शुरू होता है और रात तक चलता है। ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी दिवाली पर तीन पत्ती यानी ताश खेलता है, देवी उस पर मुस्कुराती हैं और उस पर धन की वर्षा करती हैं। दिवाली पर जुआ खेलने की परंपरा के पीछे भी एक पौराणिक कथा है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन, देवी पार्वती ने भगवान शिव के साथ पासा खेला था और उन्होंने घोषणा की थी कि जो भी दिवाली की रात को जुआ खेलेगा वह आगामी वर्ष में समृद्ध होगा। इस विशेष दिन पर मुख्य रूप से फ्लश यानी तीन पत्ती खेलने की यह परंपरा आज भी जारी है।

एक किंवदंती के अनुसार माता पार्वती के पुत्र गणेश और कार्तिकेय पासा खेलते थे, जिसकी वजह से जुआ खेलना उनका पारिवारिक खेल बना गया. माता पार्वती और देवताओं को मनोरंजन के लिए खेलना पसंद था।

उनके खेलने के दृश्य को कैलाश मंदिर की एक मूर्तिकला में देखा जा सकता है, ऐसा कहा जाता है कि दिवाली की रात जो कोई ताश नहीं खेलता, उसका गधे के रूप में पुनर्जन्म होता है. इसलिए दिवाली की रात बड़े बड़े जुआ खानों में जुआ खेलने की विशेष अनुमति दी जाती है।

ज्यादातर घरों में लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को तीन पत्ती खेलने के लिए आमंत्रित करते हैं। इस जुए में दाव बहुत कम रखा जाता है, इसमें बच्चों और महिलाओं को भी खेलने की अनुमति दी जाती है. इस दौरान बहुत ज्यादा हंसी मजाक और खाना पीना भी होता है। तीन पत्ती का ये गेम पूरे त्योहार में चार चांद लगा देता है।

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