प्रधानमंत्री ने दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन परिषद की शिखर बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन क्षेत्र-एस.सी.ओ. के सामने आने वाली समस्याओं का मूल कारण कट्टरता का बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों ने कट्टरपंथ से उत्पन्न चुनौतियों को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शंघाई सहयोग परिषद के राष्‍ट्राध्‍याक्षों की 21 वीं बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और विश्वास के लिए जरूरी है बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन को उदार, सहिष्णु, समावेशी संस्थानों और इस्लाम से जुड़ी परंपराओं के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से मध्य एशियाई क्षेत्र उदारवादी और प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का गढ़ रहा है। श्री मोदी ने कहा कि सूफीवाद जैसी परंपराएं सदियों से वहां पनपी हैं और पूरे क्षेत्र और दुनिया में फैली हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मध्य एशिया के साथ संपर्कों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि उसका मानना ​​है कि मध्य एशियाई देश भारतीय बाजारों से जुड़कर लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे में उसके प्रयास इसका समर्थन करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि संपर्क का कोई भी प्रयास एकतरफा नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे सुनिश्चित करने के लिए ऐसी परियोजनाओं को परामर्शी, पारदर्शी और सहभागी होने की जरूरत है और सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि संगठन के सदस्य देशों को प्रतिभाशाली युवाओं को विज्ञान और तर्कसंगत सोच के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स और उद्यमशीलता को एक साथ ला सकते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए यूपीआई और रुपे कार्ड जैसी तकनीक और कोविड के खिलाफ लड़ाई में आरोग्य सेतु और कोविन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, भारत ने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ साझा किये हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष शंघाई सहयोग संगठन की 20वीं वर्षगांठ है और इस अवसर पर उन्होंने संगठन के नए सदस्य ईरान का स्वागत किया और तीन नए संवाद भागीदारों- सऊदी अरब, मिस्र और कतर का भी स्वागत किया।

दुशांबे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कर रहे हैं। यह हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित होने वाला पहला एससीओ शिखर सम्मेलन है और चौथा शिखर सम्मेलन है जिसमें भारत एक पूर्ण सदस्य के रूप में भाग ले रहा है। शिखर सम्मेलन में पिछले दो दशकों में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा और सदस्‍य देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं सहित क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के सामयिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

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