प्रधानमंत्री ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र के पहले वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने आज वर्चुअल माध्यम से फार्मास्युटिकल क्षेत्र के पहले वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दिया है जो भारत को दवाओं और चिकित्‍सा उपकरणों के क्षेत्र में अग्रणी बना सके। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मास्‍युटिकल उद्योग देश के आर्थिक विकास का एक प्रमुख घटक है।

कोविड महामारी के दौरान फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र की भूमिका का उल्‍लेख करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारतीय दवा उद्योग ने इस चुनौती को बखूबी निभाया। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र द्वारा अर्जित वैश्विक विश्वास की वजह से अब भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाने लगा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने महामारी के प्रारंभिक चरण के दौरान 150 से अधिक देशों को जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात किया। श्री मोदी ने कहा कि भारत संपूर्ण मानव जाति की भलाई में विश्वास करता है।

इस अवसर पर केन्‍द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र के लिए उत्‍पाद से जुड़ी विभिन्‍न प्रोत्‍साहन योजनाओं की घोषणा की है जो देश को फार्मास्‍युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगी।

दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में 12 सत्र होंगे और इसमें 40 से अधिक देश-विदेश के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। शिखर सम्‍मेलन में नियामक वातावरण, नवाचार के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग और नवाचार बुनियादी ढांचे सहित कई विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

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