प्रधानमंत्री ने भारतीय रिज़र्व बैंक की उपभोक्‍ता संबंधी दो नवाचार योजनाओं का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक की दो नई उपभोक्‍ता केंद्रित पहल का आज वर्चुअल माध्‍यम से शुभारंभ किया। ये योजनाएं हैं–खुदरा प्रत्यक्ष योजना और रिजर्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन और रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की सबसे बडी ताकत उसकी शिकायत निवारण प्रणाली और सक्रियता है। श्री मोदी ने कहा कि ये योजनाएं देश में निवेश के दायरे का विस्तार करेंगी और निवेशकों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच आसान और अधिक सुरक्षित बनाएंगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि एकीकृत लोकपाल योजना पहल इस दिशा में महत्‍वपूर्ण परिणाम देगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खुदरा प्रत्यक्ष योजना सरकारी प्रतिभूतियों में छोटे निवेशकों के लिए आसान और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करेगी। उन्‍होंने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों के लिए गारंटीकृत निपटान का प्रावधान नागरिकों को उनकी छोटी बचत का निवेश करने के लिए सुरक्षा का आश्वासन देता है। उन्होंने कहा कि छोटे निवेशक इससे अब सरकारी प्रतिभूतियों तक सीधी पहुंच सकेंगे और उन्‍हें बैंकों, बीमा कंपनियों या म्यूचुअल फंड जैसी अप्रत्यक्ष निवेश एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना पडेगा। उन्होंने बताया कि निवेशकों को केवल रिजर्व बैंक रिटेल डायरेक्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन करके रिटेल डायरेक्ट गिल्ट खाता खोलने की जरूरत पडेगी। खाते के लिए किसी फंड मैनेजर की आवश्यकता नहीं होती है और निवेशक इसे अपने स्मार्टफोन से चला सकते हैं। इस खाते को निवेशक के बचत बैंक खाते से भी जोड़ा जा सकता है और इसे निशुल्‍क खोला जाएगा।

वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्तीय समावेशन और प्रौद्योगिकी एकीकरण जैसे बैंकिंग सुधारों के सकारात्मक प्रभाव कोविड महामारी के कठिन समय के दौरान स्पष्ट दिखे। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और बीमा सुविधाएं जो अब तक किसानों, छोटे व्यापारियों, महिलाओं, समाज के वंचित और गरीब लोगों तक नहीं पहुंच पाती थीं उन्‍हें सभी के लिए सुलभ बनाया गया।

श्री मोदी ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली अब चौबीसों घंटे काम कर रही है और अब इसे देश में कहीं से भी संचालित किया जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में भारत का डिजिटल लेनदेन 19 गुना बढा है।

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