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पीएम मोदी व आरएसएस प्रमुख करेंगे भव्य राम मंदिर में कार्यक्रम की शुरुआत

राम मंदिर के लिए रथ निकालने वाले लालकृष्ण आडवाणी नहीं होंगे वहां

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आज होने वाले भूमि पूजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. राम मंदिर के शिलान्यास समारोह से पहले राम जन्मभूमि स्थल पर रामार्चन पूजा शुरू हुई. रामार्चन पूजा, भगवान राम के आगमन से पहले सभी प्रमुख देवी-देवताओं को आमंत्रित करने के लिए एक प्रार्थना है.

कच्चे अस्थायी मंदिर में रहने वाले भगवान राम को कई सालों बाद अयोध्या में एक पक्का भव्य तीन मंजिला मंदिर मिल गया. पांच अगस्त का पूरा कार्यक्रम भले ही राम मंदिर के लिए है लेकिन, यह पूरा शो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द ही होगा.

अयोध्या में मीलों पहले से ही भूमिपूजन को लेकर राजमार्गों पर होर्डिंग्स लगी हुई हैं. इन होर्डिंग्स में बस एक ही संदेश लिखा है कि पीएम मोदी भूमिपूजन करेंगे. भले ही नाम बदलकर फैजाबाद के अतीत को हटा दें, शहर का नाम बदलकर अयोध्या कर दें, लेकिन चीजें बदलती नहीं हैं. मगर शहर में हर जगह होर्डिंग्स हैं. उन पर सिर्फ एक ही चीज नजर आ रही है- मंदिर के लिए भूमिपूजन और प्रधानमंत्री मोदी. होर्डिंग्स में जो चीज अलग नजर आती है वो सिर्फ पीएम मोदी की तस्वीर है. ज्यादातर को देखकर लगता है कि ये तस्वीरें 15 अगस्त को लाल किले से भाषण वाली हैं जिनमें पीएम मोदी पगड़ी पहने हुए हैं.

राम कोट के उस जगह भूमिपूजन होना है. वहां पर बड़े पैमाने पर वेदर प्रूफ टेंट लगे हुए हैं. वहीं समारोह का आयोजन होना है. प्रधानमंत्री समारोह का नेतृत्व करेंगे. इस बारे में बहुत बातें की गईं कि समारोह के लिए चुना गया यह क्षण कितना ठीक है. तमाम विचार विमर्शों के बाद ग्रह, नक्षत्रों के हिसाब को देखते हुए शिलान्यास के लिए समय दिन में 12:15:05 से 12:15:38 बजे के बीच तय किया गया. ये 33 सेकंड ही महत्वपूर्ण हैं जब प्रधानमंत्री इस अहम क्षण में राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे.

अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन और वहां मौजूद 175 मेहमानों को देखने के लिए बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई गई हैं. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे.

पांच अगस्त का चुनाव भी बहुत महत्व रखता है. प्रधानमंत्री मोदी ने ठीक एक साल पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए कानून बनाया था. आरएसएस का कहना है कि मोदी ने आडवाणी और अटल विहारी वाजपेयी से आगे बढ़कर काम किया है. क्योंकि उन्होंने संघर्ष किया और नतीजा दिया.

अयोध्या में लगी होर्डिंग्स में सिर्फ आरएसएस संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार, गुरु गोलवरकर, मंदिर आंदोलन से जुड़े महंत अवैद्यनाथ और फिर मोदी की तस्वीर नजर आ रही है. होर्डिंग्स के जरिये कुछ सूक्ष्म मैसेज देने की कोशिश की जा रही है? कोई मैसेज नहीं.

बस उस पर मोदी और प्रस्तावित मंदिर है. अयोध्या में मुख्य सड़क किनारे दुकानों को पीले रंग में रंग दिया गया है. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के लोग दिन भर नारेबाजी करते घूमते रहे. लेकिन अभी केवल जय श्री राम और मोदी ज़िंदाबाद के नारे ही सुने जा रहे हैं.

पहले से कहा जा रहा है कि मार्च 2024 में प्रधानमंत्री मंदिर का उद्घाटन करेंगे. यानी यह काम वह बमुश्किल अगले लोकसभा चुनाव से महीने भर पहले करेंगे. कोरोना संकट ने सोशल डिस्टेंसिंग के मापदंडों का पालन करने को मजबूर कर दिया है. यही वजह है कि अयोध्या आंदोलन के असली पुरोधा भूमिपूजन कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पा रहे हैं. राम मंदिर निर्माण के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ही भूमिपूजन कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे.

हिंदुत्व के आइकन, राम मंदिर के लिए रथ निकालने वाले और बाबरी मस्जिद को गिराने की साजिश रचने के आरोपों का सामना करने वाले लालकृष्ण आडवाणी वहां नहीं होंगे. बाबरी मस्जिद गिराने के आडवाणी के सह-आरोपी मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी कोरोना संकट के चलते भूमि पूजन कार्यक्रम में नहीं होंगे.

80 के दशक से मंदिर आंदोलन के बड़ा चेहरे रहे ये तीनों वरिष्ठ लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भूमि पूजन कार्यक्रम से जुड़ेंगे. उमा भारती अयोध्या में ही हैं लेकिन वह कार्यक्रम के दौरान सरयू घाट पर रहेंगी. उन्होंने कहा, ‘आडवाणी जैसे लोग आज खुश हैं. वो वरिष्ठ हैं. उन्होंने एक समय वाजपेयी के लिए कुर्सी तक त्याग दी थी. मैं भी बहुत प्रसन्न हूं. मैं आठ साल की थी जब मंदिर आंदोलन से जुड़ी.’ लेकिन उन्होंने आगे कहा, ‘किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि राम या राम मंदिर किसी समूह या लोगों के किसी खास समूह से जुड़ा हुआ है. ऐसा सोचना गलत होगा.’

योगी आदित्यनाथ जो भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारी के लिए दिन रात लगे रहे. उनकी भी इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपस्थिति नहीं देखी जा रही है. अयोध्या आने वाले हर एक के दिमाग में यही बात है कि यह पूरा कार्यक्रम राम मंदिर, पीएम मोदी को लेकर है, और जाहिर है आरएसएस के लिए यह मिसाल है.

राम मंदिर आंदोलन को चलाने और उसे धार देने वाले कई चेहरे आज नहीं हैं. इनमें तमाम मोर्चों पर जूझते हुए आंदोलन को जिंदा रखने वाले विश्व परिषद के अशोक सिंघल, दिगंबर अखाड़ा के राम चंद्र परमहंस, महंत अवैद्यनाथ जिन्होंने शुरू में आंदोलन का नेतृत्व किया और कई अन्य लोग आज जीवित नहीं हैं. दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने एक बार कहा था कि उनके लड़कों ने मस्जिद को ध्वस्त किया. लेकिन आज वो कांग्रेस के साथ हैं.

अयोध्या का पूरा इवेंट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगरा की याद दिलाता है जिसमें सरकार और बीजेपी ने बड़ी सावधानी से प्रधानमंत्री मोदी को प्रजेंट किया था.

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