बोगीबील पुल का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, देश का सबसे लम्बा पुल है यह

बताते चलें कि साल 1997 में इस पुल की नींव पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने रखी थी.

असम और अरुणाचल प्रदेश 4.94 किलोमीटर लंबे पुल से जुड़कर पूर्वोत्तर में तरक्की के नए दरवाजे खोलने जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 2.30 बजे दोपहर में पुल के उद्घाटन के लिए पहुंच गए थे। उन्होंने पुल का दौरा कर लोगों का अभिवादन किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने सभा को संबोधित भी किया।

पीएम मोदी ने पुल पर हरी झंडी दिखाकर पहली ट्रेन को रवाना किया। बताते चलें कि साल 1997 में इस पुल की नींव पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने रखी थी.

लेकिन इस पर काम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय में साल 2002 में शुरू हुआ। आज 21 साल बाद यह पुल बनकर तैयार है|

इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि पुल का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर हो रहा है।

ब्रह्मपुत्र नदी पर डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज बोगीबील पुल बनकर तैयार हो गया है। इससे दोनों राज्यों के बीच लोग आसानी से आ-जा सकेंगे।

नीचे दो ट्रैक पर ट्रेन गुजरेंगी और ऊपर सड़क मार्ग से वाहनों की आवाजाही हो सकेगी। इस पुल से उत्तर पूर्वी सीमा पर तैनात सेना को भी आसानी से रसद आदि पहुंचाई जा सकेगी। यानी रक्षा मोर्चे पर भी यह पुल अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गया है।

इस पुल की मजबूती की बात करें, तो इस पर सेना के टैंक भी आसानी से गुजर सकेंगे। यह पुल देश के पूर्वोत्तर इलाके की जीवन रेखा होगा और असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच संपर्क की सुविधा प्रदान करेगा।


इससे अरुणाचल प्रदेश के अंजाव, चंगलांग, लोहित, निचली दिबांग घाटी, दिबांग घाटी और तिरप के दूरस्थ जिलों को लाभ मिलेगा।

पुल की खास बातें…

– ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील में बना 4.94 किलोमीटर लंबा पुल है, जो रणनीतिक दृष्टि से अहम है।

– अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर रक्षा सेवाओं के लिए भी आड़े वक्त में खास भूमिका निभा सकता है।

– इस डबल-डेकर पुल से ट्रेन और गाड़ियां दोनों गुजर सकेंगी। ऊपरी तल पर तीन लेन की सड़क बनाई गई है।

– नीचे वाले तल पर दो ट्रैक हैं। पुल इतना मजबूत बनाया गया है कि इससे मिलिट्री टैंक भी निकल सकेंगे।

– असम से अरुणाचल जाने में 10 घंटे कम लगेंगे। डिब्रूगढ़-धेमाजी की दूरी 500 से घटकर 100 किमी बचेगी।

– बोगीबील पुल असम समझौते का हिस्सा है, जिसे साल 1997-98 में अनुशंसित किया गया था।

– पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने 22 जनवरी, 1997 को इस पुल की आधारशिला रखी थी।

– हालांकि, इस पर काम 21 अप्रैल 2002 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय में शुरू हुआ।

– यह संयोग ही है कि पुल के शुभारंभ की तारीख 25 दिसंबर है, जो वाजपेयी की वर्षगांठ का भी दिन है।

– परियोजना में देरी के कारण इसकी लागत 85 फीसद बढ़कर करीब 5,920 करोड़ रुपए हो गई।

– शुरू में इसकी लागत 3230.02 करोड़ रुपए थी। पुल की लंबाई 4.31 किमी से बढ़ाकर 4.94 किमी की गई।

– रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने पुल निर्माण को 2007 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।

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