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विजय दिवस के अवसर पर पीएम मोदी ने सेना के शौर्य और साहस को किया नमन

तीनों सेना प्रमुखों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली: भारत में हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 16 दिसंबर, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत की वजह से भारत में विजय दिवस मनाया जाता है।

वहीं विजय दिवस के मौके पर आज तीनों सेना प्रमुखों ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पहुंकर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह समेत केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर विजय दिवस के अवसर सेना के शौर्य और साहस को नमन किया।

3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारत के 11 एयरफील्ड्स पर हमला किया था। इसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ और महज 13 दिन में भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था। इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दिया था।

बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराया

इस दौरान भारत ने करीब 1 लाख युद्ध के कैदी पकड़े थे और बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद करा दिया था। इसके बाद एक नया देश, बांग्लादेश बना। भारत में हर साल 16 दिसंबर का दिन विजय दिवस का रूप में मनाया जाता है।

1971 के पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान का एक हिस्सा था जिसको ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहते थे। वर्तमान पाकिस्तान को ‘पश्चिमी पाकिस्तान’ कहते थे। कई सालों के संघर्ष और पाकिस्तान की सेना के अत्याचार के विरोध में ‘पूर्वी पाकिस्तान’ के लोग सड़कों पर उतर आए थे। लोगों के साथ मारपीट, शोषण, महिलाओं के साथ बलात्कार और खून-खराबा लगातार बढ़ रहा था। इस जुल्म के खिलाफ भारत बांग्लादेशियों के बचाव में उतर आया।

बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय ‘मुक्ति वाहिनी’ का गठन पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के विरोध में किया गया था। 1969 में पाकिस्तान के तत्कालीन सैनिक शासक जनरल अयूब के खिलाफ ‘पूर्वी पाकिस्तान’ में असंतोष बढ़ गया था। बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान के आंदोलन के दौरान 1970 में यह अपने चरम पर था।

पूर्वी पाकिस्तान में दुश्मन की 4 सैन्य टुकड़ी होने के बाद भी भारतीय जांबाज आगे बढ़ते रहे और अपना कब्जा जमा लिया। बांग्लादेश को आखिरकार 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्ति मिली।

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