पीएम मोदी आज करेंगे युगांडा की संसद को संबोधित

पीएम मोदी संसाधन समृद्ध महाद्वीप में भारत की पहुंच बढ़ाने के लिए इन देशों की यात्रा पर हैं.

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफ्रीका के तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में मंगलवार को युगांडा पहुंचे. आज पीएम मोदी युगांडा की संसद को संबोधित करेंगे. वह इस संसाधन समृद्ध महाद्वीप में भारत की पहुंच बढ़ाने के लिए इन देशों की यात्रा पर हैं.

युगांडा में मोदी, राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी से मुलाकात करेंगे, खास मुद्दों पर और शिष्टमंडल स्तर की वार्ता और भारत-युगांडा संयुक्त व्यापार कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.

साल 1997 के बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह इस देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा है. पीएम मोदी जब वहां पहुंचे तो हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया.

पीएम मोदी ने मेजबान राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के साथ विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की.

उन्होंने इस पूर्वी अफ्रीकी देश को ऊर्जा बुनियादी ढांचा, कृषि तथा डेयरी क्षेत्रों में करीब 20 करोड़ डालर के दो ऋणों की सुविधा देने की घोषणा की.

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, आधिकारिक तथा राजनयिक पासपोर्टधारकों के लिये वीजा से छूट, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम तथा सामग्री प्रशिक्षण प्रयोगशाला के क्षेत्रों में सहमति पत्रों पर दस्तखत किए.

रक्षा सहयोग बढ़ाने का आह्वान

संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा बुनियादी ढांचा, कृषि तथा डेयरी क्षेत्रों के लिए करीब 20 करोड़ डालर की दो कर्ज सुविधाओं की घोषणा की.

मोदी ने दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि ये समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं. मोदी ने कहा कि भारत युगांडा के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को तैयार है.

मोदी ने कहा कि भारत और युगांडा को सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहिए. उन्होंने युगांडा के सैन्य बल एवं नागरिकों के उपयोग के लिये वाहन एवं एम्बुलेंस देने की घोषणा की.

युगांडा के राष्ट्रपति को भारत का पुराना मित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2007 में युगांडा की पहली यात्रा उनके जेहन में अब भी बनी हुई है.

राष्ट्रपति मुसावेनी ने मोदी की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक मामलों में उनके व्यापार प्रबंधन रुख से भारत में काफी बदलाव आया.

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