राजनीति

डैमेज कंट्रोल: अब मोदी का फोकस नौकरियों पर

नई दिल्ली: नौकरियों की कमी को लेकर विपक्ष के निशाने पर आई नरेंद्र मोदी सरकार ने अगले कुछ महीनों तक बस इसी मुद्दे पर जूझने का मन बनाया है।

पीएमओ ने सभी मंत्रालयों को साफ निर्देश दे दिया है कि वे अब सिर्फ ऐसी योजनाएं लेकर सामने आएं जिसमें नए रोजगार की संभावनाओं का जिक्र हो।

कैबिनेट सचिव ने सभी सचिवों को पीएमओ के इस निर्देश की जानकारी दे दी है। गौरतलब है कि केंद्र में अपनी सत्ता के सवा 3 साल पूरी कर चुकी मोदी सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संकेत दे दिया है कि वह जॉब की कमी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे। वह अपने अमेरिका दौरे पर भी रोजगार के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

इधर, सरकार के सहयोगी दलों से लेकर संघ से जुड़े संगठनों ने भी इस मुद्दे पर पनपते असंतोष पर फीडबैक दिया है।

इसके बाद सरकार डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई है। इसके लिए पीएमओ की ओर से सभी मंत्रालयों और विभागों को नया लक्ष्य दिया गया है।

बीजेपी शासित राज्यों को भी अपने-अपने स्तर पर इस मुद्दे पर तत्काल बड़े कदम उठाने को कहा गया है।

सरकार की मंशा है कि नए जॉब पैदा करने के प्रयास जमीन पर भी दिखने चाहिए। हालांकि, खुद सरकार के आंकड़ों में नौकरियों के घटते मौके पर चिंता जताई गई थी।

 

जॉब को लेकर PMO ने दिए हैं ये निर्देश

1. सभी सरकारी रिक्त पदों के लिए 31 दिसंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।

2. किसी भी मंत्रालय के प्रस्ताव में अगर रोजगार की संभावना को लेकर प्रेजेंटेशन नहीं दिया गया तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा।

3.नीति आयोग को असंगठित क्षेत्र में नौकरियों के आंकड़े जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि जॉब के आंकड़े पुराने हैं और इसमें सिर्फ संगठित क्षेत्र के आंकड़े शामिल हैं।

4. मुद्रा योजना के तहत काम कर रहे लोगों की लिस्ट और उनके प्रॉजेक्ट के अंदर मिले जॉब के आंकड़े अलग से जारी किए जाएंगे।

5. जॉब का डेटा हर महीने जारी हो। नीति आयोग अभी हर तीसरे महीने जॉब के आंकड़े जारी करने के पक्ष में है,

लेकिन प्रधानमंत्री चाहते हैं कि विकसित देशों की तर्ज पर भारत में भी जॉब के आंकड़े हर महीने जारी हों।

 

जॉब पर सरकार की नाकामी को कांग्रेस बनाएगी मुद्दा

दूसरी तरफ राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस ने संकेत दे दिया है कि 2019 के आम चुनाव में वह बेरोजगारी के मुद्दे पर ही नरेंद्र मोदी सरकार से मुकाबला करेगी।

अमेरिका में राहुल के कई जगह छात्रों से संवाद करने के बाद अब कांग्रेस देश में युवाओं के बीच पहुंचने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने वाली है।

सूत्रों के अनुसार, राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहला और बड़ा अभियान यही होगा।

इसके तहत कांग्रेस देश के तमाम विश्वविद्यालयों तक जाएगी और नौकरी के नए अवसर किस तरह बढ़ाए जाएं और नीतियों में क्या बदलाव हो, इस मुद्दे पर बात करेगी।

पार्टी छात्रों के साथ संवाद से निकली बात को अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल करेगी।

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