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चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर पीएम मोदी स्वच्छाग्रहियों को करेंगे सम्मानित

नई दिल्ली : महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए चंपारण सत्याग्रह को 100 साल पूरे हो गए हैं. चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंपारण में विभिन्न योजनाओं का शुभारंभ करेंगे. प्रधानमंत्री ने इस दिन को ‘सत्याग्रह से स्वच्छग्रह’ के रूप में मानने के लिए ‘चलो चंपारण’ अभियान शुरू किया था. स्वच्छ भारत मिशन के तहत काम करने वाले देशभर से स्वच्छाग्रही बिहार पहुंच रहे हैं.

देशभर के करीब 20 हजार स्वच्छाग्रही इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए चंपारण पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं ये स्वच्छाग्रही बिहार के विभिन्न जिलों में लोगों को जागरूक करने का भी काम कर रहे हैं. इन से प्रधानमंत्री 10 स्वच्छाग्रहियों को मंच से सम्मानित करेंगे. यूनिसेफ द्वारा एक कार्यक्रम में 3 अप्रैल को दिल्ली में ‘चलो चंपारण’ अभियान की शुरूआत की थी. बता दें कि यूनिसेफ भारत में स्वच्छता पर बड़े स्तर पर काम कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की थी. इस मिशन का मकसद भारत को खुले में शौच मुक्त करना है. पीएम मोदी ने कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कहा था कि 2 अक्टूबर, 2019 को गांधीजी की 150वीं जयंति तक भारत को पूरी तरह खुले में शौच मुक्त करना है.

खुले में शौच मुक्त हो रहा है भारत : यूनिसेफ के वाश कार्यक्रम के प्रमुख निकोलस ओसबर्ट ने बताया कि इस अभियान के शुरू में भारत में 55 करोड़ लोग खुले में शौच करते थे. लोगों में जागरूकता अभियान चलाकर मार्च, 2018 तक खुले में शौच करने वालों की संख्या 25 करोड़ पर आ गई है. उन्होंने बताया कि स्वच्छता कार्यक्रम से लोगों की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है. खुले में शौच करने से गंदगी होने पर बीमारियां बढ़ती थीं, अब उनमें तेजी से कमी आ रही है और इससे एक परिवार सालाना 50,000 रुपये की बचत कर रहा है. क्योंकि अब उसे गंदगी जनित बीमारियों पर खर्च करना नहीं पड़ रहा है.

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 3.38 लाख गांवों में 6.5 करोड़ शौचालय बनवाए गए हैं. देश के करीब 338 जिले इस कार्यक्रम में कवर किए गए हैं. उन्होंने बताया कि सरकार टॉयलेट बनवाने के साथ-साथ उनका निरंतर इस्तेमाल करने के लिए भी जागरूक करने का काम कर रही है.

स्वच्छाग्रहियों का सम्मान : इस मिशन को अपने मकसद तक पहुंचाने में स्वच्छाग्रही का अहम रोल है. स्वच्छाग्रही इस कार्यक्रम में पैदल सैनिक का काम कर रहे हैं. स्वच्छाग्रही समाज के ही वे लोग हैं जो अन्य लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक कर रहे हैं. इस समय देशभर में करीब 4.2 स्वच्छाग्रही लोगों को खुले में शौच नहीं करने के लिए प्रेरित करने का काम कर रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि इन स्वच्छाग्रहियों की संख्या 2019 तक 6.5 लाख हो जाए. आज प्रधानमंत्री 10 स्वच्छाग्रहियों को चंपारण में सम्मानित करेंगे.

चलो चंपारण : महात्मा गांधी ने 10 अप्रैल, 1917 में बिहार के लोगों में शिक्षा, स्वास्थ्य, हुनर, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे उठाते हुए चलो चंपारण अभियान शुरू किया था. आज इस अभियान के 100 साल पूरे हो रहे हैं. इस उपलक्ष्य में सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह अभियान शुरू किया गया था. परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि 3 अप्रैल से 10 अप्रैल तक देश के विभिन्न हिस्सों ने 20 हजार से अधिक स्वच्छाग्रहियों ने बिहार के विभिन्न जिलों में स्वच्छता मिशन को जनांदोलन में बदलने के लिए काम किया है.

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