छत्तीसगढ़

कवि अशोक शिरोडे की कविता ▪कोरोना की चुनोती▪

मनीष शर्मा:
कोरोना के डर से
दुबके है घर में,
बिना कर्फ्यू के सन्नाटा
पसरा है शहर में ।
कोरोना कितना बलशाली
साबित हुआ
भयभीत इंसान बोना
साबित हुआ ।
तोड़ी देश की सरहदें
धर्म की दीवारें
हिल गई जग की
ताकतवर सरकारें ।
अदृश्य वायरस ने
कमाल कर दिया,
सबको एक कतार में
खड़ा कर दिया ।
न फतवा दिया किसी ने
न किसी ने श्राप
पंडे-मौलवी डर के
बैठे हैं चुपचाप ।
पूजाघर इबादतगाहो में
ताले हैं लगे हुए
सिर्फ अस्पताल ही हैं
हालात को सम्हाले हुए ।
विज्ञानवादियों ने यह
चुनोती स्वीकारी है,
हो रहे अनुसंधान
नित शोध जारी है ।
अजेय नहीं है कोरोना
मिल ही जायेगा हल,
अपने अस्तित्व को बचाने
मनुष्य सदा रहा है सफल ।।

अशोक शिरोडे, बिलासपुर

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