छत्तीसगढ़

“आमी दुरंतो बोईशाखी झड़” तथा ” एशो आलो एशो” से पोहेला बोईशाख का स्वागत किये

खबरीलाल रिपोर्ट

रायपुर सिटी महा कालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति के सदस्यों ने बंगाली नववर्ष “पोहेला बोईशाख” का बड़े भक्तिमय परिवेश में काली पूजन तथा पुष्पांजलि अर्पित  कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से “बर्षो बरण” किये यानी बंगाली नए वर्ष 1425 का स्वागत किये। सर्वप्रथम विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ प्रभात मुखर्जी, कल्याण राय, श्रीमती अमिया बाला राय तथा कार्यकारणी सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुरुवात किये।

समिति के महासचिव गौतम मजूमदार ने अपने स्वागत भाषण में सभी का स्वागत करते हुए बंगाली संस्कृति के बारे में नए प्रजन्म को अवगत  करवाये। तत्पश्चात बंगाल के प्रख्यात नाटककार दक्षिणा रंजन मुखर्जी द्वारा “भूल रास्ता” का मंचन किया जिसमें वे लोगों को यह संदेश दिए कि “भूख” एक ऐसा कारण है जो लोगों को एक होने पर विवश कर देता है। पहले के जमाने मे जात पात देखकर ऊंचे कुल के लोग भोजन ग्रहण करते थे लेकिन जब वे विपरीत परिस्थिति में फंस जाते थे तब अपनी भूख और तृष्णा मिटाने के लिए उन्हें नीचे जात के लोगों के द्वारा बनाया गया भोजन करना पड़ता था।

इससे उन्होंने यह भी संदेश दिया कि दुनिया मे केवल एक ही जाती है और वह है मनुष्यता का। नाटक के पश्चात अंकिता दस द्वारा कोन से आलोर स्वप्नों…, रुपाली मुखर्जी द्वारा आज मोन चेयेछे…, दुर्गा दास द्वारा आमी दुरंतो बोईशाखी झड़…., लीला दास द्वारा आलो आर आलो दिए तथा एमोन स्वप्नों कखोनो देखिनी आमी गाने से उपस्थित सभी का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात समिति के युवा सदस्यों दीप चक्रबर्ती, बाबू राय, जतिन रॉय, सौरभ रॉय, रिकी रॉय , जयदीप आदि द्वारा उपस्थित प्रत्येक को भोग प्रसाद वितरित किये और समिति के अध्यक्ष एवं कार्यकारणी सदस्यों ने आगामी 9 मई को कवि गुरु रबिन्द्रनाथ टैगोर के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर “रविन्द्र जयंती” कार्यक्रम आयोजित किये जाने की बात कही जिसमे प्रत्येक को उपस्थित होने हेतु आग्रह किया गया।

इस विशेष अवसर पर बंगाली समाज के दीपतेश चटर्जी, मानब गांगुली, सत्यजीत राय, जगन्नाथ साहा, डालिया दास, नारायण राय, मिनोति चटर्जी, दोला गांगुली, मौ राय, डॉ प्रियदर्शिनी मुखर्जी, सुजीत सिन्हा एवं आदि गणमान्य लोग उपस्थित होकर एक साथ बंगाली नववर्ष का स्वागत किये।

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