छत्तीसगढ़

पुलिस ने और कसा शिकंजा, गांवों में हो रही निगरानी

रायपुर।

नक्सलियों ने दो दिसंबर से पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी(पीएलजीए) का स्थापना दिवस मनाने का एलान किया है। नक्सली हर साल यह आयोजन करते हैं। इस बार नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व बदलने के बाद यह आयोजन हो रहा है लिहाजा सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की गतिविधियों पर शिकंजा और कस दिया है।

उनकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। जंगल में सुरक्षाबलों के दस्ते गश्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। तेलंगाना का बड़ा हिस्सा बस्तर से सटा हुआ है। वहां नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का एलान भी कर रखा है। इसे देखते हुए सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है।

बस्तर और तेलंगाना की सीमाओं पर फोर्स की संयुक्त गश्त जारी है। हर वाहन की तलाशी ली जा रही है। पुलिस की सख्ती का असर भी दिख रहा है। पीएलजीए सप्ताह के पहले दिन बस्तर समेत पड़ोसी राज्यों आंध्र, तेलंगाना, ओड़िशा और महाराष्ट्र से भी किसी नक्सल वारदात की सूचना नहीं है। नक्सलियों ने दो दिन पहले दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल इलाके में पर्चे फेंककर गांव-गांव में पीएलजीए सप्ताह मनाने का आह्वान किया था।

इन पर्चों में सरकार को उखाड़ फेंकने और जनताना सरकार की स्थापना करने, जनयुद्ध और तेज करने आदि के बारे में लिखा गया है। नक्सलियों के एलान के बाद अंदरूनी इलाकों में परिवहन में थोड़ी दिक्कत जरूर आई लेकिन बस, ट्रक आदि निर्बाध चलते रहे। बस्तर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर नक्सली सप्ताह का कोई असर नहीं पड़ा। हाट बाजार भी खुले रहे। सड़कों पर पुलिस का पहरा दिखा।

नक्सलियों ने तेलंगाना में चुनाव बहिष्कार के लिए एक गीत वायरल किया है। किसी नक्सली हरिभूषण के नाम से जारी इस गीत में चुनावों को जनता के पैसे की बर्बादी बताया गया है। तेलंगाना के चुनाव में नक्सली कोई हरकत न कर पाएं इसके लिए छत्तीसगढ़ की फोर्स भी लगी हुई है।

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