वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का विरोध कर रहे ग्रामीणों को पुलिस ने खदेड़ा

ग्रामीणों ने जब हाथों में पत्थर उठा लिया था, तो पुलिस को हल्का बल का प्रयोग करना पड़ा।

गिरिडीह : वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का विरोध कर रहे ग्रामीणों को पुलिस ने बल प्रयोग कर निर्माण स्थल से खदेड़ दिया। इसके बाद पुलिस काम आरंभ कराया गया।

बुधवार को इस योजना के तहत बनाए जा रहे प्लांट निर्माण कार्य आरंभ करने के लिए सीमा लैब नामक एजेंसी ने जेसीबी लेकर जमीन काटने लगा। तभी गांव की महिलाएं, बच्चे एवं पुरुषों ने मौके पर पहुंचकर काम को रुकवा दिया। इसकी सूचना प्रशासन को दी।

इसके बाद सदर प्रखंड के सीओ धीरज ठाकुर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पहले तो ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन जब वे नहीं माने और हंगामा करने लगे तो ग्रामीणों को भगाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया। हालांकि सीओ ने लाठी चार्ज किए जाने से इंकार किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि ग्रामीणों ने जब हाथों में पत्थर उठा लिया था, तो पुलिस को हल्का बल का प्रयोग करना पड़ा।

ग्रामीणों ने जमीन को अपना बताकर कहीं और प्लांट लगाने का किया आग्रह :

झरियागादी में नाली के पानी को एकत्र कर उसका फिर से प्रयोग करने के लिए सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है। करीब चार करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से इसे बनाने के लिए चार एकड़ भूमि को चिन्हित किया गया।

साथ ही नगर निगम को भू-अर्जन विभाग की तरफ से एनओसी भी दिया गया यह कहते हुए उक्त स्थल गैरमजरुआ है। इसपर प्लांट बनाया जा सकता है। इसके बाद प्रक्रिया पूरा करने के बाद इसके निर्माण का काम सीमा लैब को सौंपा गया।

जिस जमीन पर भू-अर्जन विभाग ने जीएम लैंड बताकर काम आरंभ करने को कहा उसी जमीन को वासुदेव पंडित, सुखदेव पंडित, ढालो पंडित, पवन पंडित, दिलीप पंडित, रामू पंडित, भोला पंडित समेत 52 ग्रामीणों ने अपना बताकर काम करने से मना कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि उक्त जमीन 1915 से उनके दादा-परदादा के नाम पर है, जिसका मालगुजारी रसीद भी अंचल कार्यालय से कट रहा है। इसके बावजूद उनकी जमीन को अधिग्रहण किए बगैर ही जबरन प्रशासन प्लांट बनवा रहा है। इसलिए इसका वे विरोध कर रहे हैं।

जहां काम हो रहा है वह जीएम है जीएम लैंड : सदर प्रखंड के अंचलाधिकारी धीरज ठाकुर का कहना है कि जिस जमीन को ग्रामीण अपना बता रहे हैं, वह गैरमजरुआ है। बेवजह वे बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं। पूछे जाने पर कि ग्रामीणों के नाम रसीद कटा है, वह क्या है,

पर कहा कि वह वर्ष 2015-16 के पूर्व कटा हुआ है। ऐसे तो कई स्थानों के रसीद काट दिए गए है, इसका मतलब यह नहीं कि जमीन उनकी है। भू-अर्जन विभाग ने इसे जीएम लैंड बताया है। इसके बावजूद ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन को सख्त होना पड़ा।

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