पुलिस ने तस्करों से बचाया लेकिन आफत बने ऊंट, थाने के पेड़-पौधे खा गए

राजस्थान. चूरू जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां तीन हफ्ते से एक थाने के पुलिसकर्मी तस्करों से छुड़ाए गए ऊंटों की देखभाल में लगे हैं। ऊंटों के खाने-पीने से लेकर उनके स्वास्थ्य की देखभाल भी थाने के पुलिसकर्मी ही कर रहे हैं। यह सब तब हुआ जब इन ऊंटों को तस्करों के हाथ से बचाया गया। अब ये ऊंट उल्टा पुलिस के लिए आफत बन गए हैं। हालत ये है कि ये ऊंट थाने पर लगे पेड़ पौधों को खा गए।

दरअसल, यह घटना चूरू जिले के सिधमुख थाने की है। यहां तस्करी में बचाए गए ऊंट 19 जुलाई को लाए गए थे और इसके बाद से ये सभी ऊंट इसी थाने में हैं। थाने के सभी पुलिसकर्मियों के पास अब इनके भोजन और देखभाल की व्यवस्था करने का अतिरिक्त काम दिया गया है। लेकिन जिस बात से पुलिसकर्मियों को तकलीफ हुई है, वह यह है कि इन ऊंटों ने पेड़ों को उगाने में सालों की मेहनत बेकार कर दी है. ऊंट थाने में लगे पेड़-पौधों को खा गए हैं।

पुलिस स्टेशन के एसएचओ कृष्ण कुमार ने बताया कि हेड कांस्टेबल बृजेश सिंह के नेतृत्व में तीन पुलिसकर्मियों की एक टीम दिन भर ऊंटों की देखभाल कर रही है। भोजन और अन्य खर्च पुलिस की टीम द्वारा ही वहन किया जाता है। बारी-बारी से सभी ऊंटों की देखभाल की जा रही है और उनकी सभी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 19 जुलाई को ऊंट तस्करी की सूचना मिली तो पशु निगरानी दल ने वाहन को रोक लिया और वहां पुलिस की टीम भी पहुंच गई। एक ट्रक से कुल 13 ऊंटों को बचाया गया। इसके बाद पशुओं पर अत्याचार और राजस्थान ऊंट (वध निषेध और अस्थायी प्रवास का नियमन) अधिनियम, 2015 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत में गिरफ्तार आरोपी ट्रक चालक ने कहा कि उसने ऊंट खरीदे थे और उन्हें मेहंदीपुर बालाजी ले जा रहे थे। फिलहाल इसकी जांच चल रही है और इस मुद्दे को उप-मंडल मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा निपटाया जाएगा। अदालत ने 6 अगस्त को इन ऊंटों को सिरोही स्थित एक गैर सरकारी संगठन को छोड़ने और सौंपने का निर्देश दिया, लेकिन सिरोही 500 किमी से अधिक दूर होने के कारण अभी तक यह संभव नहीं हो पाया है।

एसएचओ कृष्ण कुमार ने यह भी बताया कि फिलहाल पुलिस अब अन्य जिला कलेक्टरों से संपर्क कर रही है क्योंकि उन्हें ले जाने के लिए लगभग तीन-चार ट्रकों की आवश्यकता होगी, साथ ही ऊंटों को अक्सर डॉक्टर की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि हमें उनकी देखभाल करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने परिसर में लगाए गए 100-150 पेड़ों को खा लिया। हमें उन्हें तीन समय का भोजन देना पड़ रहा है।

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