आज शाम फिर खुलेंगे सबरीमाला के कपाट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

प्रदर्शनकारी बोले.कवरेज के लिए महिला पत्रकारों को न भेजे सबरीमाला

सबरीमाला। सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचे घमासान के बीच सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर के कपाट एक बार फिर खुलने जा रहे हैं। हालांकि इस दफा मंदिर एक विशेष पूजा के लिए सोमवार शाम पांच बजे खुलेगा और मंगलवार रात दस बजे बंद हो जाएगा।

बता दें कि पिछले महीने हुए उग्र विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए हैं। पूरे सबरीमाला को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। दर्शनार्थियों की सुरक्षा व सुचारू दर्शन-पूजन के लिए मंदिर के इर्द-गिर्द 2,300 जवानों की तैनाती की गई है। इनमें 20 सदस्यीय कमांडो टीम व 100 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले महीने दस से पचास वर्ष की उम्र के बीच की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।

इसको लेकर हिंसक प्रदर्शन भी हुए। दरअसल हिंदू संगठनों ने पचास वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देने का एलान किया है। इसी के मद्देनजर प्रशासन विशेष पूजा को लेकर पहले से ही मुस्तैद है।

पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, पंबा, निलक्कल, एलावुंगल और सन्निद्धम (मंदिर परिसर) में धारा 144 लागू कर दी गई है। इन इलाकों में चार से अधिक लोगों के एक साथ जुटने पर पाबंदी लगी हुई है। उसका कहना है कि जरूरत पड़ी तो पचास वर्ष से अधिक उम्र की 30 महिला अधिकारियों की तैनाती मंदिर परिसर में भी की जा सकती है।

सभी उम्र की महिलाओं को दर्शन-पूजन की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह दूसरा मौका है, जब सबरीमाला मंदिर खुल रहा है। कोर्ट के निर्णय के बाद पिछले महीने जब मंदिर के कपाट खुले थे, तब उग्र प्रदर्शनकारियों ने करीब एक दर्जन महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में कई जगह हिंसक झड़पें भी हुईं। मीडिया कर्मियों को भी निशाना बनाया गया। भगवान अयप्पा के मंदिर से जुड़े पंडलम राज परिवार ने सबरीमाला को छावनी में तब्दील करने के लिए राज्य सरकार की कटु आलोचना की है।

राजपरिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक यज्ञ के आयोजन का ऐलान भी किया है। इस बीच मंदिर आंदोलन की अगुआई करने वाले संगठन सबरीमाला कर्म समिति ने संपादकों को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि वे कवरेज के लिए महिला पत्रकारों को सबरीमाला भेजने से परहेज करें।<>

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