पुलिस वालों ने ग्रामीणों पर फायरिंग की है, उस समय वहां नहीं था कोई माओवादी: घायल ग्रामीण

अलग-अलग दावा कर रहे हैं ग्रामीण और पुलिस

बीजापुर।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के मोदकपाल थाना क्षेत्र के ओतकलपाड़ा के जंगलों में तड़के सुबह पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुआ. एसपी कमलोचन कश्यप ने दावा किया है कि इंटेलिजेंस की सूचना के आधार पर जवानों ने कार्रवाई की है.

वहीँ मुठभेड़ में घायल एक ग्रामीण का कहना है कि पुलिस वालों ने ग्रामीणों पर फायरिंग की है, उस समय वहां कोई माओवादी नहीं था. अब ऐसे में बीजापुर में हुए इस मुठभेड़ पर कई तरह के सवाल उठ रहे है.

एसपी कमलोचन कश्यप के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे माओवादियों के साथ जवानों की मुठभेड़ हुई है. पुलिस को इंटेलिजेंस से जंगल में माओवादी की मौजूदगी की सूचना मिली थी.

पुलिस का ये भी कहना है कि मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग से 2 ग्रामीण चपेट में आ गए है. जिसमें से एक ग्रामीण की मौत हो गई है, जबकि दूसरे का जिला अस्पताल में इलाज जारी है.

ग्रामीण दुब्बा कन्ना की मौत

मुठभेड़ में घायल ग्रामीण यालम धरमैय्या ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया है कि एनकाउंटर के दौरान कोई माओवादी मौजूद नहीं थे. पुलिस के जवानों ने एकतरफा फायरिंग किया है. पुसगुड़ी गांव के 5 ग्रामीण सुबह जंगल में घूमने गए थे. जवानों की फायरिंग में 2 ग्रामीणों को गोली लगी है. एक ग्रामीण दुब्बा कन्ना की मौत हो चुकी है.

बताया जा रहा है कि बाकी जो तीन ग्रामीण घटना स्थल से भाग गए थे उनमें से एक अस्पताल में घायल के साथ है और एक मृतक के अंतिम संस्कार में लगा हुआ है. यदि वो नक्सली होते तो वापस गांव क्यों आते ?

वहीं एसपी कमलोचन कश्यप ने का कहना है कि इंटेलिजेंस की सूचना के आधार पर फोर्स उस इलाके में निकली थी. तड़के सुबह माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई है. जिसमें सर्चिंग के दौरान दो लोगों को पकड़ा गया है. जिसमें एक की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जबकि दूसरा घायल है.

एसपी से सवाल किया गया कि घायल ग्रामीण ने पुलिस पर एकतरफा फायरिंग करने का आरोप लगाया है. घटना स्थल पर कोई माओवादी मौजूद नहीं होने की बात कही है. जिस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि मुठभेड़ के बाद ऐसे आरोप लगाए जाते हैं. हमारी सूचना के आधार पर हमने कार्रवाई की है.

कुल मिलाकर यह मुठभेड़ सवालों के घेरे में है. इसमें कितने सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा. क्योंकि ग्रामीण और पुलिस दोनों ही अलग-अलग दावा कर रहे हैं.

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