अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीति हुई तेज़

-अविश्वास प्रस्ताव

सत्ता पक्ष जहां राजनीतिक दलों के समर्थन से गदगद है वहीं कांग्रेस ने अपने आपको नंबर गेम से लेकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भी काफी हद तक समेटना शुरू कर दिया है। पार्टी की योजना अब केवल मोदी सरकार के चार साल के कामकाज पर जोरदार हमला बोलने के साथ-साथ विपक्षी दलों की एकजुटता का संदेश देते हुए उन्हें सहयोग देने तक सिमट गया है।

कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपने रुख में थोड़ा सा बदलाव किया है। उसने एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, सपा, राजद समेत अन्य सहयोगियों से चर्चा करने के बाद अपनी संसद में 20 जुलाई की रणनीति तैयार की है। इसमें पार्टी के मुख्य वक्ता केन्द्र सरकार के कामकाज पर उसे घेरेंगे। सदन में सत्ता पक्ष की तरफ से चलने वाले आक्रमण की धार भोथरी करेंगे। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी बोलेंगे।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष आनंद शर्मा का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष जरूर बोलेंगे। राहुल गांधी सरकार को उसके चार साल के कामकाज का आईना दिखाएंगे। पार्टी को सदन में बोलने के लिए 38 मिनट का समय आवंटित है। इसे केन्द्र में रखकर कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष के भाषण को पहले करा लेने की रणनीति तैयार की है। ताकि दिन भर टीवी चैनलों पर राहुल गांधी की चर्चा को प्राथमिकता मिल सके।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अविश्वास पर चर्चा का जवाब देंगे। प्रधानमंत्री सदन में चर्चा का जवाब देते समय आम तौर पर 40 मिनट, 50 मिनट या एक घंटे से अधिक समय तक ले लेते हैं। बताते हैं सदन में चर्चा और राजनीतिक दलों को लेकर कल भी मंत्रणा हुई थी। इसमें सत्ता पक्ष के रणनीतिकारों ने फ्लोर प्रबंधन पर काफी ध्यान दिया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने खुद राजनीतिक दलों के सहयोगियों को फोन करके उनसे सहयोग मांगा। सत्ता पक्ष को इसका अच्छा परिणाम भी मिला है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री के चर्चा का जवाब देने पर भी चर्चा हुई।

अविश्वास प्रस्ताव पर वैसे तो सात घंटे की चर्चा ही प्रस्तावित है, लेकिन यह नौ घंटे से अधिक समय तक चलती है। ऐसे में समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी सात बजे के बाद चर्चा का जवाब दे सकते अपनी बात रखने में लोकसभा में इस समय प्रधानमंत्री का कोई सानी नहीं हैं। यह उनकी सरकार के कामकाज के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव है, इसलिए वह जमकर विपक्ष पर हमला बोल सकते हैं। सरकार के दीन-ईमान और जनता के बीच में पैदा हुए विश्वास का खाका खींचते हुए विपक्ष के गुब्बारे की हवा निकाल सकते हैं। ताकि टीवी समाचार चैनल के प्राइम टाइम से लेकर अगले दिन सुबह तक सरकार अखबार में सही स्थान पा सके।

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में दम नहीं

यह विपक्ष का सरकार के कामकाज के खिलाफ विधवा विलाप जैसा हो जाने की संभावना है। अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस और टीडीपी ने नोटिस दिया था। नियमों का हवाला देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने टीडीपी के नोटिस को मंजूरी दी है। टीडीपी यह नोटिस आंध्र प्रदेश के साथ भेदभाव और विशेष राज्य का दर्जा न दिए जाने के केन्द्र में दिया है। चर्चा की शुरुआत भी टीडीपी को ही करनी है।

टीडीपी तीन साल से अधिक समय तक केन्द्र सरकार की सहयोगी थी। ऐसे में विपक्ष के सबसे अधिक सांसदों वाले दल कांग्रेस के पास अपना पक्ष रखने के सिवा कुछ खास नहीं है। विपक्ष चाहता था कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा दस दिन के भीतर हो, लेकिन यह नोटिस दिए जाने के ठीक दो दिन बाद हो रही है। इस स्थिति में कांग्रेस की रणनीति विपक्ष की एकता का संदेश देते हुए सरकार के कामकाज पर उसे आईना दिखाना ही है।

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